
विजय और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस। (फाइल फोटो- ANI)
अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पहली बार एंट्री के बाद धमाकेदार जीत दर्ज की है।
108 सीटें जीतकर वह सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा अभी छू नहीं पाई। अब गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर लिखित समर्थन मांग रहे हैं।
इससे पहले, ठीक ऐसा ही मामला महाराष्ट्र चुनाव के दौरान देखा गया था। चुनाव नतीजों के बाद भाजपा इसी तरह के आंकड़े के साथ जूझ रही थी, पर महाराष्ट्र में गवर्नर ने सुबह-सुबह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शपथ दिला दी।
अब दोनों राज्यों के इन फैसलों की तुलना हो रही है। सवाल उठ रहे हैं कि गवर्नर सही कर रहे हैं या नहीं। इस पर पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरिश साल्वे ने साफ कहा है कि गवर्नर कोई गलत काम नहीं कर रहे।
टाइम्स नाउ की नविका कुमार से बात करते हुए उन्होंने कहा- मैं नहीं मानता कि गवर्नर संविधान से बाहर जा रहे हैं या ऐसा कोई असाधारण कदम उठाया है जिसके लिए उनके पद की आलोचना हो।'
साल्वे ने कहा कि गवर्नर के पास कुछ जगह होती है। अगर वे लिखित समर्थन मांगते हैं तो इसमें गलत क्या है? यह संवैधानिक तरीके से ही काम करना है।
बता दें कि महाराष्ट्र में जब फडनवीस सरकार बनी तो गवर्नर ने सुबह जल्दी शपथ दिलाकर स्थिर सरकार बनाने का रास्ता साफ कर दिया।
उधर लोगों का कहना है कि वहां तेजी से फैसला लिया गया ताकि कोई अनिश्चितता न रहे। दूसरी तरफ, तमिलनाडु में स्थिति अलग है।
TVK के पास 108 विधायक हैं। बहुमत के लिए 118 चाहिए। कांग्रेस ने समर्थन का ऐलान कर दिया है, लेकिन गवर्नर स्पष्ट 118 विधायक का लिखित प्रमाण चाहते हैं।
विजय गवर्नर से मिल चुके हैं और सरकार बनाने का दावा पेश किया है। लेकिन शपथ की तारीख अभी तय नहीं हुई। गवर्नर पूछ रहे हैं कि क्या इतने कम नंबरों के साथ स्थिर सरकार चल पाएगी।
इस पर हरिश साल्वे ने राज्यपाल का बचाव करते हुए कहा कि गवर्नर को यह देखना होता है कि कोई पार्टी साफ बहुमत साबित कर रही है या नहीं। बिना ठोस सबूत के जल्दबाजी में शपथ दिलाना ठीक नहीं।
उन्होंने कहा- 'गवर्नर की आलोचना करने से पहले उनकी भूमिका समझिए। लिखित में समर्थन देना कोई बड़ी बात नहीं है।' अब टीवीके के लिए अब चुनौती है कि वह और समर्थन जुटाए या गवर्नर को पूरा विश्वास दिलाए।
कांग्रेस का समर्थन मिला है, लेकिन आंकड़े अभी 118 तक नहीं पहुंचे लगते। कुछ रिपोर्ट्स में 113 या उससे कम का जिक्र है। ऐसे में गवर्नर सतर्क हैं।
Published on:
07 May 2026 11:08 pm
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