
रनवे पर फ्लाइट। (फाइल फोटो- IANS)
चेन्नई में दूसरा एयरपोर्ट (Chennai Second Airport) बनने का सपना एक बार फिर धुंधला सा होता नजर आ रहा है। टीवीके प्रमुख विजय की चुनावी जीत के बाद परांडूर के आसपास के गांवों में खुशी की लहर है।
हजारों परिवारों के खेत और घर बचाने का वादा करके आए विजय अब सत्ता की दहलीज पर हैं। इस बीच, गांव वाले उनसे अपना वादा पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने एक्कनापुरम गांव में रहने वाले जी सुब्रमण्यम समेत अन्य किसान के हवाले से बताया कि विजय की जीत के बाद उन्होंने चेन्नई पहुंचकर टीवीके नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने विजय को बधाई दी और साफ कहा कि अब नई सरकार बनने के बाद इस मुद्दे पर बात होगी।
गांव वालों ने टीवीके नेता से मांग की कि एयरपोर्ट के लिए परांडूर की बजाय कोई दूसरी जगह चुनी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि खेतों को उद्योग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन लोगों को बेघर नहीं किया जाना चाहिए।
विजय ने चुनाव प्रचार में जोर देकर कहा था कि उन्हें विकास से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन परांडूर साइट गलत है। यहां पर्यावरण को खतरा है और हजारों परिवार बेघर होंगे।
उन्होंने वादा किया था कि वे कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और 1000 दिन से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ खड़े होंगे। अब गांव वाले उसी वादे को याद दिला रहे हैं।
परांडूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट करीब 2325 हेक्टेयर यानी 5746 एकड़ जमीन पर बनने वाला है। इसमें 13 गांव आते हैं। करीब 3774 एकड़ निजी जमीन है और बाकी सरकारी।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार भी इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे चुकी है। केंद्र सरकार ने पिछले साल इसकी मंजूरी दी थी। चेन्नई एयरपोर्ट की बढ़ती भीड़ को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया। लेकिन स्थानीय लोग मानने को तैयार नहीं।
खास बात यह है कि यहां कई जल स्रोत हैं, तालाब और पानी की व्यवस्था है। पर्यावरण कार्यकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि एयरपोर्ट बनने से इनका बड़ा नुकसान होगा।
करीब 1000 परिवार विस्थापित होंगे, जिनमें एक्कनापुरम के ही 650 परिवार शामिल हैं। सरकार 285 वर्ग फुट के घर देने की बात कर रही है, लेकिन लोग अपने खेत और मौजूदा घर नहीं छोड़ना चाहते।
2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजे की बात चल रही है। अधिकारी 1549 से 1822 करोड़ रुपये तक खर्च का अनुमान लगा रहे हैं। लेकिन गांव वालों का कहना है कि अभी सही से बातचीत भी शुरू नहीं हुई।
यह पहली बार नहीं है जब चेन्नई में दूसरा एयरपोर्ट बनाने की कोशिश की गई है। 1999 से बात चल रही है। श्रीपेरंबुदूर, तांब्रम, मरैमलाई नगर जैसी कई जगहों पर चर्चा हुई।
2007 में भी करुणानिधि सरकार ने 4000 एकड़ पर प्लान बनाया था, लेकिन जमीन के महंगे मुआवजे और नए कानून के बाद प्रोजेक्ट बंद हो गया। तब भी सिर्फ 800 एकड़ सरकारी जमीन थी। अब परांडूर प्रोजेक्ट भी उसी राह पर लग रहा है।
Updated on:
07 May 2026 09:55 pm
Published on:
07 May 2026 09:53 pm
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