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रामायण, महाभारत, वेद पढ़ाएगा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, 3 नए कोर्स हुए शुरू

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) इस साल से रामायण, महाभारत, वेद की शिक्षा देगा। इसके लिए 3 नए कोर्स हिंदू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय साहित्य और संग्रहालय शुरू किए गए हैं। इस साल यह कोर्स 1 सितंबर से शुरू होकर मई 2023 में खत्म होगा।

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Indira Gandhi National Center for the Arts will teach Ramayana, Mahabharata, Vedas, 3 new courses started

अगर आप रामायण, महाभारत, वेद की पढ़ाई करना चाहते हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दरअसल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) ने इस साल तीन नए कोर्स शुरू किए हैं, जिसके जरिए रामायण, महाभारत, वेद और पुराणों को पढ़ाया जाएगा। इन कोर्स के जरिए 11 पाठ्यक्रमों की पेशकश की जा रही है। इन तीनों कोर्स के नाम हिंदू अध्ययन, भारतीय ज्ञान परंपरा, भारतीय साहित्य और संग्रहालय हैं, जो आज से शुरू हो गए हैं और यह मई 2023 में खत्म होंगे।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के एक अधिकारी ने बताया कि देश में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और IIT-खड़गपुर के अलावा हिंदू अध्ययन पर कोई भी विश्वविद्यालय कोर्स नहीं चला रहे हैं। इसके साथ ही अधिकारी ने बताया कि 'भारत के विचार को समझने के लिए' भारतीय ज्ञान परंपरा कोर्स को शुरू किया गया है।


इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अधिकारी ने कोर्स के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ये कोर्स हिंदू परंपरा के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म की भी एक झलक प्रस्तुत करेगा। ये कोर्स छात्रों को भगवान कृष्ण, बुद्ध, महावीर, पतंजलि, कबीर, अरबिंदो और गुरू नानक की शिक्षाओं से परिचित कराते हैं। उन्होंने कहा कि अभी भारत में कोई भी विश्वविद्यालय इस तरह के पाठ्यक्रम को नहीं पढ़ा रहे हैं।


अधिकारियों ने बताया कि 'भारतीय साहित्य और संग्रहालय' के जरिए प्राचीन भाषाओं, भारतीय साहित्य और देश भर के लेखकों सहित आधुनिक भारतीय भाषाओं के बारे में पढ़ सकेंगे। इसके साथ ही इस कोर्स में 18 काम भी सिखाए जाएंगे।


इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के अधिकारियों ने बताया कि इस साल इन कोर्स के लिए भौतिक कक्षाएं ही शुरू की गई हैं, जिसके कारण दिल्ली में रहकर ही इन कोर्स कर सकते हैं। हालांकि अगले साल से ऑनलाइन माध्यम से भी इन कोर्स की कक्षाएं ली जाएंगी, जिसके जरिए देश के साथ विदेशों में भी लोग इन कोर्स के जरिए रामायण, महाभारत, वेद और पुराण के बारे में पढ़ सकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि विदेशों में भारतीय युवा के अलावा शिक्षाविदों, शिक्षकों, कर्मचारियों और सांस्कृतिक विचारकों के बीच इन कोर्स को लेकर उत्सुकता देखने को मिल रही है।