
नेताओं को चंदा, धंधेबाजों का धंधा और जनता, यानी सरकार के खजाने को चपत। कंपनियों व अन्य करदाताओं को राजनीतिक दलों को चंदे पर टैक्स में राहत का नियम यही कहानी कहता है। केंद्र सरकार को 2022-23 में राजनीतिक दलों को चंदे की रकम पर टैक्स से छूट के कारण 3967.54 करोड़ रुपए से हाथ धोना पड़ा। आयकर में छूट का यह नियम भले ही सरकार ने बनाया हो लेकिन हकीकत में इससे जनता के खजाने को ही चपत लगी है। इस रकम से अनेक विकास कार्य करवाए जा सकते हैं। टैक्स में छूट का लाभ उठाने में कॉरपोरेट कंपनियों के अलावा फर्में तथा हफ (हिंदू अविभाजित परिवार) व व्यक्तिगत करदाता शामिल हैं।
अधिकृत जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार राजनीतिक दलों को चंदे पर छूट से पिछले नौ साल में करीब 12270 करोड़ रुपए की टैक्स छूट दे चुकी है। वर्ष 2014-15 में यह राशि महज करी 170 करोड़ रुपए थी जो 2022-23 तक करीब 4000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। पिछले वित्तीय वर्ष (2023-24) के आंकड़ों का अभी इंतजार है।
राजनीतिक दलों को वैध रूप से आर्थिक मदद के लिए टैक्स में छूट का प्रावधान आयकर अधिनियम में किया गया है। अधिनियम की धारा 80जीजीबी और 80जीजीसी के अनुसार भारतीय कंपनियों, फर्मों, संगठन, निकाय, व्यक्तियों या हफ करदाताओं को राजनीतिक दलों को चेक, ऑनलाइन या चुनावी बांड के जरिये दी गई चंदे की राशि कुल आय में से घटा कर शेष पर आयकर की गणना की जाती है।
टैक्स में छूट जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 29ए के तहत चुनाव आयोग में पंजीकृत दल को चंदा देने पर ही मिलती है। देश में छह राष्ट्रीय दल, 57 राज्य स्तरीय दल तथा 2764 अन्य राजनीतिक दल हैं।
Published on:
31 Jul 2024 07:35 am
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