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ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध का दायरा बढ़ा, भारत ने तेल आपूर्ति पर कह दी बड़ी बात…

Iran-US Israel War: ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध गंभीर होता जा रहा है और इसके साथ ही इसका दायरा भी बढ़ रहा है। इसी बीच भारत की तरफ से तेल आपूर्ति पर बड़ा बयान सामने आया है।

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भारत

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Tanay Mishra

Mar 06, 2026

Oil supply in India

Oil supply in India (Photo - AI Generated)

अमेरिका (United States Of America) और इज़रायल (Israel) का ईरान (Iran) के खिलाफ चल रहा युद्ध गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यह युद्ध करीब महीनेभर चल सकता है। युद्ध को 6 दिन पूरे हो चुके हैं और इस युद्ध का दायरा भी बढ़ गया है। ऐसे में ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि इसका असर भारत (India) में तेल की आपूर्ति पर पढ़ सकता है, लेकिन अब इस बारे में भारत की तरफ से बड़ा बयान सामने आ गया है।

देश में तेल आपूर्ति की चिंता नहीं

भारत की तरफ से साफ कर दिया गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति रुकने के बाद देश में तेल-गैस का संतोषजनक भंडार मौजूद है। इससे देश में तेल आपूर्ति की कोई चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। गौरतलब है कि ईरानी सेना के कमांडर ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से अगर कोई भी जहाज गुज़रने की कोशिश करेगा तो उसे आग लगा दी जाएगी। इससे वैश्विक तेल सप्लाई पर प्रभाव पड़ा है। भारत का 40% तेल इसी रास्ते से आता है और इसी वजह से तेल की आपूर्ति पर असर पढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

राहुल गांधी भी उठा चुके हैं सवाल

युद्ध की वजह से भारत में तेल आपूर्ति के संकट पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भी सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर निशाना साधते हुए गुरुवार को सोशल मीडिया पर लिखा, "दुनिया एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है। तूफान का खतरा (संकट का दौर) मंडरा रहा है। भारत की तेल सप्लाई खतरे में है, क्योंकि हमारे आयात का 40% से ज़्यादा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। एलपीजी और एलएनजी के लिए स्थिति और भी बदतर है। ईरान-अमेरिका इज़रायल युद्ध हमारे पड़ोस तक पहुंच गया है। हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत को मार गिराया गया है। फिर भी प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ऐसे समय में हमें एक स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है। इसके विपरीत भारत के पास एक ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो समझौतावादी हैं और उन्होंने हमारी रणनीतिक स्वायत्तता को सरेंडर कर दिया है।"