
जयशंकर ने कुछ समय पहले एक मजेदार किस्सा सुनाया था। (PC: Facebook/jaishankar)
S Jaishankar birthday: विदेश मंत्री एस. जयशंकर कूटनीतिक मोर्चे पर भारत के लिए कई बार 'संकटमोचक' साबित हुए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब भारतीय सेना पाकिस्तान को घर में घुसकर मार रही थी, तब जयशंकर दुनिया को भारतीय कार्रवाई की जरूरत के बारे में समझा रहे थे। उनके प्रयासों के चलते ही पाकिस्तान इस मामले में पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया और अमेरिका जैसे देशों ने भारत के रुख का समर्थन किया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज यानी 9 जनवरी को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। चलिए उनसे जुड़ा एक रोचक किस्सा जानते हैं, जिसके बारे में उन्होंने ही खुद कुछ समय पहले बताया था।
एस. जयशंकर का पूरा नाम है सुब्रमण्यम जयशंकर। विदेश मंत्री बनने से पहले वह विदेश सचिव की भूमिका में थे। वह देश के पहले ऐसे विदेश सचिव हैं, जो विदेश मंत्री भी बने। मोदी सरकार में उन्हें 2019 को विदेश मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया, तब से अब तक वह इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। उनके कार्यकाल में विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कुछ बड़े ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। इसमें ऑपरेशन गंगा, ऑपरेशन कावेरी, ऑपरेशन अजय, ऑपरेशन वंदे भारत और ऑपरेशन सिंधु शामिल हैं। पिछले साल ईरान-इजरायल संघर्ष में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित वापस लाने के लिए चलाए गए ऑपरेशन सिंधु की काफी तारीफ हुई थी।
जयशंकर ने कुछ वक्त पहले बताया था कि जब वह विदेश सचिव के तौर पर विदेश मंत्रालय का हिस्सा बने, तो उनकी छवि पासपोर्ट वाले व्यक्ति की हो गई। लोग उन्हें Passport Guy पुकारने लगे थे। 2024 में ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में एक भारतीय कम्युनिटी इवेंट को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा था - जब मैं विदेश मंत्रालय का हिस्सा बना, तो जहां मैं रहता हूं वहां मेरी छवि पासपोर्ट वाले आदमी के तौर पर हो गई थी। लोग कहते थे कि पासपोर्ट बनवाया है, तो जयशंकर से संपर्क करो, वह किसी से बात करके पासपोर्ट बनवा देगा। जयशंकर के अनुसार, उस समय पासपोर्ट बनवाना वाकई मुश्किल काम था। कई चक्कर लगाने पड़ते थे, दलाल भी सक्रिय रहते थे, लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब लोगों को किसी से संपर्क करने की जरूरत नहीं, एक आवेदन पर पूरी प्रक्रिया आसानी से हो जाती है।
जयशंकर ने बताया कि उस समय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं और उन्होंने इस दिशा में काफी काम किया था। उन्होंने कहा मैं विदेश सचिव था और सुषमा स्वराज विदेश मंत्री, हम नियमित रूप से मीटिंग करते थे और अलग-अलग पासपोर्ट ऑफिस से फीडबैक लेते थे कि प्रक्रिया कितने दिनों में पूरी होती है। हमने इस पर काफी काम किया और आज नतीजा सबके सामने है। अब पासपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता, सबकुछ बेहद तेज और आसान हो गया है। जब जयशंकर ने बताया कि लोग उन्हें पासपोर्ट दिलवाने वाला आदमी कहने लगे थे, तो इवेंट में मौजूद हर कोई खिलखिला कर हंसने लगा।
इसी तरह, जब जयशंकर को विदेश मंत्री बनाया गया, तो उनके बेटे ने एक ट्वीट करके कहा था कि कोई मुझसे पासपोर्ट बनवाने या वीजा में मदद का अनुरोध न करे। मैं इस मामले में कोई मदद नहीं कर पाऊंगा। ध्रुव जयशंकर ने 31 मई, 2019 को अपने ट्वीट में लिखा था - और इससे पहले कि कोई पूछे, मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं पासपोर्ट, वीज़ा या विदेश की जेल से बाहर निकालने जैसी किसी भी समस्या में मदद नहीं कर सकता। मेरी अपनी बहुत समस्याएं हैं (जेल के अलावा, मैं इन सब से दूर रहना चाहता हूं)। बता दें कि जयशंकर 1977 बैच के आईएफएस अधिकारी हैं। उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भरोसेमंद समझा जाता है। सुषमा स्वराज के बाद उन्हें 2019 में देश का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया था।
Updated on:
09 Jan 2026 11:47 am
Published on:
09 Jan 2026 11:42 am
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