scriptJammu And Kashmir: विश्व के सबसे ऊंचे चिनाब पुल पर 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से दौड़ी पहली ट्रेन, देखिए Video | J&K: First train ran at a speed of 40 km per hour on the world's highest Chenab rail bridge, watch video | Patrika News
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Jammu And Kashmir: विश्व के सबसे ऊंचे चिनाब पुल पर 40 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से दौड़ी पहली ट्रेन, देखिए Video

Indian Rail on world’s highest railway Chenab Rail Bridge: जम्मू-कश्मीर को विश्वसनीय परिवहन प्रणाली प्रदान करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा निर्माणाधीन 272 किलोमीटर की उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना में उधमपुर से बारामूला तक कश्मीर घाटी को भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाली लंबी रेलवे लाइन का केवल 17 किलोमीटर का भाग बाकी रह गया है।

जम्मूJun 20, 2024 / 06:56 pm

Anand Mani Tripathi

Indian Rail on world’s highest railway Chenab Rail Bridge: भारतीय रेलवे ने जम्मू-कश्मीर में कश्मीर घाटी को शेष भारत से रेललिंक से जोड़ने की दिशा में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की और संगलदान से रियासी तक करीब 46 किलोमीटर के खंड पर मेमू ट्रेन का पहली बार सफल परीक्षण किया जिसमें दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब रेल पुल शामिल है। जम्मू-कश्मीर को विश्वसनीय परिवहन प्रणाली प्रदान करने के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा निर्माणाधीन 272 किलोमीटर की उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना में उधमपुर से बारामूला तक कश्मीर घाटी को भारतीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ने वाली लंबी रेलवे लाइन का केवल 17 किलोमीटर का भाग बाकी रह गया है।
8 कोच की ट्रेन का हुआ सफल परीक्षण
रेलवे बोर्ड, उत्तर रेलवे और कोंकण रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा चिनाब पुल के निरीक्षण के बाद गुरुवार को एक आठ कोच वाले मेमू ट्रेन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। रामबन जिले के संगलदान और रियासी के बीच 46 किलोमीटर की विद्युतीकृत लाइन खंड पर मेमू ट्रेन 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गुजरी। ट्रेन संगलदान से 12:35 बजे चल करके 14:05 बजे रियासी स्टेशन सफलतापूर्वक पहुंची।
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नौ सुरंगों का किया सामना
यह ट्रेन नौ सुरंगों से होकर गुजरी, जिनकी कुल लंबाई 40.787 किलोमीटर है और सबसे लंबी सुरंग टी-44 करीब 11.13 किलोमीटर की है। यह पहली पूरी ट्रेन थी जिसने चिनाब नदी पर दुग्गा और बक्कल स्टेशनों के बीच दुनिया के सबसे ऊंचे आर्च रेल पुल को पार किया है। इस रेलखंड में रियासी, बक्कल, दुग्गा और सावलकोटे स्टेशन रियासी जिले में स्थित हैं। इस खंड पर रेलवे विद्युतीकरण कार्य भारतीय रेलवे पर पहली बार 25 केवी पर अत्याधुनिक तकनीक, आरओसीएस (रिगिड ओवरहेड कंडक्टर सिस्टम) के साथ किया गया है।
तेजी से चल रहा है 17 किलोमीटर के खंड पर काम
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि रियासी से श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन के बीच करीब 17 किलोमीटर की खंड बाकी रह गया है जिसमें एक सुरंग का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। यह काम भी करीब एक माह में पूरा हो जाने की आशा है। इसे बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे राष्ट्र की जनता को समर्पित करेंगे। इससे कश्मीर से कन्याकुमारी तक आवाजाही आसान हो जाएगी।
बानिहाल-संगलदान खंड का उद्घाटन कर चुके हैं पीएम मोदी
यूएसबीआरएल परियोजना में करीब 48.1 किलोमीटर लंबे बानिहाल-संगलदान खंड का उद्घाटन इसी साल 20 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था इस खंड में करीब 43 किलोमीटर का हिस्सा सुरंगों में स्थित है। सबसे पहले 118 किलोमीटर लंबे काजीगुंड-बारामूला खंड के पहले चरण का उद्घाटन अक्टूबर 2009 में किया गया था। जून 2013 में 18 किलोमीटर लंबे बानिहाल-काजीगुंड खंड और जुलाई 2014 में करीब 25 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्री माता वैष्णो देवी कटरा खंड का उद्घाटन हुआ था।
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यह देश की राष्ट्रीय परियोजना है
यह आज़ादी के बाद भारतीय रेलवे की सबसे चुनौतीपूर्ण रेल परियोजना है। कश्मीर घाटी के लिए निर्बाध और परेशानी मुक्त कनेक्टिविटी प्रदान करने में यूएसबीआरएल परियोजना के महत्व को देखते हुए, इसे वर्ष 2002 में “राष्ट्रीय परियोजना” घोषित किया गया था। यूएसबीआरएल परियोजना में 38 सुरंगें हैं जिनकी कुल लंबाई 119 किलोमीटर हैं। सबसे लंबी सुरंग (टी-49) की लंबाई 12.75 किलोमीटर है और यह देश की सबसे लंबी परिवहन सुरंग है। पुलों की संख्या 927 है जिनकी कुल लंबाई 13 किलोमीटर है। इन पुलों में प्रतिष्ठित चिनाब पुल की कुल लंबाई 1315 मीटर, आर्क विस्तार 467 मीटर और नदी तल से ऊंचाई 359 मीटर है, जो एफिल टॉवर से लगभग 35 मीटर ऊंचाई पर है और इसे दुनिया का सबसे ऊंचा आर्क रेलवे पुल माना गया है।
जमीन से लेकर दिल तक का होगा जुड़ाव
यह पुल इस तरह के परीक्षणों की एक श्रृंखला के सफल संचालन के बाद, अब सभी ट्रेन सेवाओं को चलाने के लिए उपलब्ध होगा जो जम्मू क्षेत्र और शेष भारत के साथ कश्मीर घाटी के निर्बाध एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। यह लोगों और वस्तुओं की आसान आवाजाही को सुविधाजनक बनाकर सामाजिक एकीकरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन और व्यापार जैसी आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
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