ममता बनर्जी ने जोशीमठ भू धंसाव के मुद्दे और कॉलेजियम के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर आज निशाना साधा है। इससे पहले कल भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज लगातार दूसरे दिन मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्र पर निशाना साधा है। उन्होंने समय पर आवश्यक कार्रवाई में देरी करने के लिए केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि "जब संभावित भूस्खलन की चेतावनी थी तो आवश्यक कदम क्यों नहीं उठाए गए? जोशीमठ में स्थिति बहुत खतरनाक है। इस स्थिति के लिए उत्तराखंड शहर के लोग "जिम्मेदार नहीं हैं। अगर कोई आपदा आती है तो लोगों की देखभाल करना सरकार का कर्तव्य है। सरकार को युद्ध स्तर पर कदम उठाने चाहिए ताकि लोगों को परेशानी न हो।"
इसके साथ ही ममता बनर्जी ने कहा कि "न्यायपालिका को आज़ादी होनी चाहिए। अगर कॉलेजियम में केंद्र सरकार का प्रतिनिधी रहेगा तो राज्य सरकार का भी प्रतिनिधी होना चाहिए। लेकिन जब राज्य सरकार कॉलेजियम के लिए अपनी सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट को भेजेगी तो सुप्रीम कोर्ट उसे केंद्र सरकार को भेजेगी। ऐसे में राज्य सरकार की सिफारिश का कोई मतलब नहीं रह जाएगा और केंद्र सरकार न्यायपालिका में दखल देना शुरू करेगी, यह हम नहीं चाहते।"
केंद्र सरकार के समर्थन के बिना चल रहा मनरेगा
इससे पहले बीते दिन सोमवार को ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि बंगाल ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) केंद्र सरकार से बिना किसी समर्थन के चला रहा है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था।
जोशीमठ को बचाने के लिए शंकराचार्य करेंगे 100 दिनों का धार्मिक अनुष्ठान
ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जोशीमठ में हो रहे भू धंसाव के लिए लगातार अंधाधुध तरीके से हो रहे विकास को जिम्मेदार ठहराया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जोशीमठ को बचाने के लिए आगामी 100 दिनों तक धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे।