
जंक फूड (File Photo)
कभी स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों के हाथ में अमरूद, मूंगफली या घर का बना नाश्ता होता था लेकिन आज उसकी जगह चिप्स, बर्गर, पिज़्ज़ा और कोल्ड ड्रिंक जैसी चीज़ों ने ले ली है। यह आदत बच्चों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। हालत यह है कि देश में पिछले कुछ वर्ष में जंक फूड (Junk Food) की बिक्री बहुत तेज़ी से बढ़ी है। इससे सरकार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता भी बढ़ गई है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एनआईएन) की अगुवाई में तैयार विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट ने चेताया है कि अगर बच्चों को अभी नहीं संभाला गया तो मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी बीमारियाँ कम उम्र में ही सामान्य हो सकती हैं। इसी खतरे को देखते हुए समिति ने कई सख्त सुझाव दिए हैं। इनमें स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर रोक, बच्चों को ध्यान में रखकर किए जाने वाले विज्ञापनों पर नियंत्रण, खाद्य पैकेटों पर बड़े और आसानी से पहचान में आने वाले चेतावनी लेबल और ज़्यादा नमक, चीनी और वसा वाले खाद्य पदार्थों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की सिफारिश शामिल है। सरकार इन सुझावों पर विचार कर रही है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य से होने वाले खिलवाड़ को रोका जा सकेगा।
रिपोर्ट के अनुसार भारत (India) में जंक फूड की खपत लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2006 में इन उत्पादों की खुदरा बिक्री 0.9 बिलियन डॉलर थी, जो 2019 तक बढ़कर 37.9 बिलियन डॉलर पहुंच गई। वर्तमान में यह बिक्री और भी ज़्यादा है।
जंक फूड के कारण मोटापा भी तेज़ी से फैल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग के 23.5% भारतीय ज़्यादा वजन या मोटापे का शिकार हैं। पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 % से बढ़कर 27.3% हो गया है। महिलाओं में यह 24% से बढ़कर 30.7% तक पहुंच गया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जंक फूड की बढ़ती खपत इस समस्या के प्रमुख कारणों में से एक है।
कर्नाटक सरकार ने कुछ दिन पहले ही राज्य में स्कूलों और अस्पतालों में जंक फूड की बिक्री पर बैन लगाने की घोषणा की है। स्वास्थ्य पर जंक फूड के दुष्परिणामों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया।
Updated on:
24 Jul 2026 05:32 am
Published on:
24 Jul 2026 05:32 am
