
उत्तर प्रदेश में बुंदेलखंड क्षेत्र जब देता है तो छप्पर फाड़ के देता है, पर बदले में उसे उम्मीदों के मुताबिक नहीं मिलता। अलग राज्य से लेकर भरपूर पानी तक के तमाम टूटते सपनों के बीच एक बार फिर बुंदेलखंड बड़ी उम्मीदों के साथ वोट देने की तैयारी कर रहा है। बुंदेलखंड की चर्चा होते ही बेरोजगारी, जल संकट और पलायन सबसे पहले याद आता है। उत्तरप्रदेश में कानपुर से झांसी और महोबा-चित्रकूट तक वृहद बुंदेलखंड की दस लोकसभा सीटों में से सभी सीटों पर इस समय भाजपा काबिज है।
भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती इन सीटों को बचाना ही है। पार्टी ने दस में से नौ सीटों पर अपने मौजूदा सांसदों को ही टिकट दिया है, सिर्फ कानपुर के टिकट की घोषणा होनी अभी बाकी है। कांग्रेस-सपा गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से कानपुर और झांसी सीटें आई हैं, तो समाजवादी पार्टी जालौन, हमीरपुर-महोबा, बांदा-चित्रकूट, फतेहपुर, कन्नौज, इटावा, फर्रुखाबाद व अकबरपुर सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बहुजन समाज पार्टी लोकसभा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के बीच गठबंधन था और इसका सीधा मुकाबला भाजपा से था। इस बार यह लड़ाई बदलने की उम्मीद जताई जा रही है। कुछ सीटों पर तो त्रिकोणात्मक संघर्ष होने की भी उम्मीद है।
पक्ष-विपक्ष के दावे
विपक्ष का कहना है कि बेरोजगारी और किसानों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। बेरोजगार युवा परेशान हैं। वहीं भाजपा के नेता बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे, डिफेंस कॉरिडोर के साथ विकास और विरासत के मसले पर जनता से वोट मांग रहे हैं। विपक्ष कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है तो भाजपा क्षेत्र से डकैती उन्मूलन का दावा भी कर रही है।
चुनावी मुद्दों की कमी नहीं
अलग राज्य, जल संकट और पलायन का मसला खुलकर चर्चा में है। उत्तर प्रदेश सरकार वर्ष 2007 में यह प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। भाजपा ने भी अलग बुंदेलखंड राज्य का वादा किया था। प्रतिभा पलायन का मसला भी है।
,
Updated on:
27 Mar 2024 08:40 am
Published on:
27 Mar 2024 08:37 am

बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
