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Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र में ठाकरे Vs ठाकरे की तैयारी

महाराष्ट्र में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब कानूनी दावपेचों पर अल्प विराम लग गया है और सियासी दावपेचों में तेजी देखी जा रही है। इस पूरे सियासी संघर्ष में अब एक नए खिलाड़ी की एंट्री का भी अनुमान लगाया जा रहा है। इस नए खिलाड़ी का नाम हो सकता है राज ठाकरे।

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सत्ताधारी शिवसेना में बगावत के बाद महाराष्ट्र में नए सियासी समीकरण के संकेत हैं। ठाणे के कद्दावर नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बागी विधायक राज ठाकरे की महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) में शामिल हो सकते हैं। ऐसा हुआ तो महाराष्ट्र में शिवसेना को लेकर चल रही उद्धव बनाम शिंदे की लड़ाई ठाकरे बनाम ठाकरे में तब्दील हो जाएगी। गुवाहाटी के होटल में डेरा जमाए शिंदे के साथ 49 विधायक हैं। इनमें 39 एमएलए शिवसेना के हैं। सर्जरी के बाद आराम कर रहे मनसे मुखिया राज ठाकरे से शिंदे दो बार फोन पर बातचीत कर चुके हैं। इस तरह की अटकलें शिंदे गुट या मनसे की ओर से खारिज नहीं की गई हैं।

शिंदे के पाला बदलने से हो जाएंगे मनसे के 50 विधायक

शिंदे के साथ शिवसेना के दो तिहाई से ज्यादा विधायक हैं। ऐसे में वे आसानी से पाला बदल सकते हैं। विश्लेषकों के मुताबिक मनसे में शामिल होने के बाद बागी गुट के लिए सत्ता की सीढ़ी आसान हो जाएगी। शिवसेना की ही तरह कट्टर हिंदुत्व और मराठी मानुष के हितों की बुनियाद पर खड़ी मनसे के रिश्ते भाजपा के साथ अच्छे हैं। मनसे का एक ही विधायक है। बागी गुट के आने के बाद पार्टी के पास विधायकों की संख्या 50 पार कर जाएगी। समीकरण बदला तो राज भाजपा के साथ महाविकास आघाडी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने और नई सरकार के गठन पर चर्चा कर सकते हैं।

बैकफुट पर आ जाएगी शिवसेना

भाजपा पर्दे के पीछे से बागियों की मदद कर रही है। विश्लेषकों के मुताबिक इससे एक तीर से कई निशाने सधेंगे। शिवसेना बैकफुट पर तो मनसे फ्रंट फुट पर आ जाएगी। राज ठाकरे 2005 तक शिवसेना की युवा इकाई के नेता थे। चुटीले भाषण और कार्टून के जरिए कटाक्ष में माहिर राज को शिवसेना के संस्थापक दिवंगत बालासाहेब का उत्तराधिकारी माना जाता था। उद्धव को कमान देने के फैसले से नाराज राज ने जनवरी, 2006 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उसी साल मार्च में उन्होंने मनसे नाम से अलग पार्टी बनाई। इससे शिवसेना को जोर का झटका लगा था। पार्टी के कई नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राज के पाले में आ गए। मनसे सत्ता का स्वाद भले नहीं चख पाई, मगर उसके बाद के चुनावों में शिवसेना को नुकसान पहुंचाती रही है। माना जा रहा कि शिवसेना के बागी विधायक मनसे के लिए संजीवनी साबित हो सकते हैं। उद्धव और राज रिश्ते में चचेरे भाई हैं।

मनसे में विलय हुआ तो बागी गुट को होगा फायदा...

कोर्ट में हो सकती है समीक्षा

बात करें, कानूनी दावपेंचों की तो, डिप्टी स्पीकर की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी और देवदत्त कामत ने 27 जून को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि विधायकों की अयोग्यता से संबंधित मामला विधानसभा स्पीकर/डिप्टी स्पीकर के कार्यक्षेत्र में आता है। इसलिए अदालत को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के ही एक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि सदन की कार्यवाही की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। बागी विधायकों की ओर से पेश अधिवक्ता नीरज किशन ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा था कि यदि स्पीकर/ डिप्टी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लंबित हो तो वे विधायक को अयोग्य घोषित करने का फैसला नहीं कर सकते।

अयोग्यता का मामला: सुप्रीम कोर्ट से बागी विधायकों को 14 दिन की राहत...

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र के बागी विधायकों को 14 दिनों की राहत देते हुए अयोग्यता नोटिस पर 12 जुलाई शाम 5.30 बजे तक रोक लगा दी। डिप्टी स्पीकर नरहरि जिरवाल ने बागी विधायकों को अयोग्य ठहराने की शिवसेना की याचिका पर नोटिस देकर सोमवार (17 जून) शाम 5.30 बजे तक जवाब मांगा था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेबी परदीवाला की पीठ ने बागी नेता एकनाथ शिंदे और 15 अन्य विधायकों की दो याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। अगली सुनवाई 11 जुलाई होगी।

विधायकों को जान का खतरा...

कोर्ट के ऐसा पूछने पर कि उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया, याचिकाकर्ताओं ने कहा कि मुंबई के हालात ठीक नहीं हैं। विधायकों को धमकियां मिल रही हैं। इस पर सरकार के अधिवक्ता ने लिखित बयान दिया कि सरकार ने बागियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय किए हैं और सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि 39 बागी विधायकों और उनके परिवार को कोई नुकसान न हो।

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