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राजस्थान-एमपी में भी MSM बन रहा खतरा, पुरुषों में बढ़ रही AIDS की बीमारी

पुरुषों में पुरुष मित्र होने की इच्छा काफी तीव्र हो रही है। कोड नेम से सोशल मीडिया पर करते हैं सर्च। पढ़ें बांसवाड़ा से अनुपम दीक्षित की रिपोर्ट

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जयपुर

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Ashish Deep

Jul 18, 2025

दक्षिण राजस्थान और एमपी के कुछ बॉर्डर एरिया में MSM तेजी से बढ़ रहा है। Patrika

महानगरों का रोग राजस्थान पहुंच गया है। दक्षिण राजस्थान और मध्यप्रदेश के बॉर्डर इलाकों में बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया और एस्कोर्ट एप के जरिए तलाश रहे हैं पुरुष दोस्त। कोडनेम-डबल डेकर, कोती, पंती, टॉप, बॉटम और MSM…। यह ऐसी शब्दावली है, जो सिर्फ मर्दों की मर्दों से जिस्मानी भूख मिटाने के लिए आम जिन्दगी से अनजान दुनिया में चलता है। खासकर, दक्षिण राजस्थान के डूंगरपुर, बांसवाड़ा और पड़ोसी मध्यप्रदेश के रतलाम क्षेत्र में…। इन कोडवर्ड के जरिये सम्पर्क में आकर बड़े पैमाने पर हो रहा मेन-टू-मेन सेक्स (MSM) अब एचआइवी तक को न्योता दे रहा है। यह बेहद चौंकाने वाला है। परिचित और अनजान लोग सम्पर्क में आकर खुद को और दूसरों को सौगात में बेहिसाब जानलेवा रोग दे रहे हैं।

अस्पताल चेकअप के लिए गया तो HIV पॉजिटिव निकला

उदाहरण के लिए बांसवाड़ा की एक मिल का युवा श्रमिक बीमार होने पर अस्पताल गया तो पता चला कि वह एड्स रोगी है। लगातार 9 दिन तक काउंसलिंग के बाद उसने राज खोला कि वह MSM में लिप्त था। तीन बेटियों के उस पिता को जब रोग की गंभीरता बताई तो उसने पूरे परिवार का टेस्ट कराया। गनीमत रही कि निरोग निकले। वह किसके सम्पर्क में आया, जब इसकी तहकीकात की तो रोग देने वाला नौकरी छोड़कर जिले से भाग गया।

‘पंती’ को ट्रैक करना बेहद मुश्किल

यह रोग फैलने से रोकना नामुमकिन सा भी है क्योंकि बाकी तमाम टर्म को छोड़कर ‘पंती’ को ट्रैक करना चिकित्सा और स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए बेहद मुश्किल है। खास बात, यह केवल जिस्मानी भूख और शौक के लिए हो रहा है। इसे पुरुष वेश्यावृत्ति भी नहीं कहा जा सकता। जिंदगी दांव पर लगा रहे लोगों में श्रमिक से लेकर सुरक्षा एजेंसियों और चिकित्सा महकमे से जुड़े प्रोफेशनल्स तक शामिल हैं।

3 जिलों में 450 से ज्यादा

MSM में शामिल 45 पार उम्र के लोगों की यौन रोगों से जुड़ी कोई मॉनीटरिंग भी नहीं की जाती है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार अकेले बांसवाड़ा जिले में 200, डूंगरपुर में 150 और प्रतापगढ़ में 100 लोग हैं, जो MSM के जरिये गम्भीर यौनरोगों की चपेट में आ गए। उदयपुर और रतलाम जैसे बड़े जिलों में इनकी तादाद हजारों में हो सकती है।

पैसों का लेन-देन नहीं

इस स्याह दुनिया की पत्रिका टीम ने पड़ताल की तो सामने आया कि 99 फीसदी मामलों में पैसे का कोई लेन-देन नहीं होता। ज्यादातर लोग शौक से इसमें लिप्त हो रहे। बांसवाड़ा के एमजी अस्पताल के काउंसलर और एक एनजीओ के कार्मिकों ने भी इसकी पुष्टि की। ये एड्स कंट्रोल सोसायटी से जुड़े हैं, जिनके पास पूरा रिकॉर्ड मौजूद है।

अंधेरी कोड भाषा और भूमिका

‘डबल डेकर, कोती, पंती, टॉप, बॉटम, वर्सेटाइल, एमएसएम या MSM’ जैसी संज्ञाओं का मतलब आम व्यक्ति नहीं समझ पाता।

कोती : पुरुष होकर स्त्री का रोल प्ले करता है
टॉप : स्त्री का रोल प्ले करने वाले के विपरीत भूमिका
बॉटम : पूरी तरह स्त्री जैसी भूमिका
वर्सेटाइल : मेल-फीमेल, दोनों का रोल प्ले करता है
MSM : मेल-टू-मेल सेक्स

(इन संज्ञाओं के इस्तेमाल से नेटवर्क की पहचान और संबंध तय होते हैं)

‘पंती’ का कोई रिकॉर्ड नहीं

तमाम टर्म में से ‘पंती’ एक ऐसी शब्दावली है, जिसके दायरे में आते लोगों का कोई रिकॉर्ड ट्रैक नहीं हो रहा। वजह यह वह अनजान पुरुष होता है, जो किसी दूसरे मर्द से बेहद कम वक्त के लिए सम्पर्क में आकर गायब हो जाता है। जरूरत पड़ने पर वह पैसा भी दे जाता है। ऐसे लोग किसी शादी, सार्वजनिक समारोह या सोशल मीडिया के जरिये भी सम्पर्क में आ जाते हैं।

नाम छिपाने की शर्त पर खोल दिए राज

इस काम में लिप्त रहे गुप्तचर व सुरक्षा महकमे के एक अधिकारी ने बताया, ‘कुछ चीजें पर्दे में अच्छी लगती हैं।’ नर्सिंग से कॅरियर शुरू करने वाले एक युवा ने कहा- मुझे पता नहीं चला, कब यह शौक लग गया। अब मेरे संपर्क में कुल 14 लोग हैं। एक संविदाकर्मी ने बताया कि उसके 10-12 लोगों से संपर्क हैं। एक बैंक में कार्यरत पड़ोसी जिले के युवक ने कहा, उसकी दिलचस्पी केवल मर्दों में है। शहर की घनी आबादी में रहने वाले एक युवक ने बताया, मुझे लोकल से डर लगता है। इसलिए डूंगरपुर से मर्दों को बुलाता हूं।

क्या कहते हैं वैश्विक आंकड़े

Joint United Nations Programme on HIV/AIDS के मुताबिक दुनियाभर में हर साल नए HIV संक्रमणों में लगभग 17% से ज्यादा मामले MSM कम्युनिटी में होते हैं, जबकि ये जनसंख्या का बहुत छोटा प्रतिशत हैं। 2023 की रिपोर्ट में कहा गया कि MSM में HIV संक्रमण का खतरा सामान्य जनसंख्या के मुकाबले 28 गुना ज्यादा है। NACO के मुताबिक
भारत में MSM में HIV प्रिवलेंस करीब 4-6% है, जबकि सामान्य जनसंख्या में यह लगभग 0.22% है। यानी MSM कम्युनिटी में HIV का फैलाव सामान्य पुरुषों की तुलना में अधिक है।