
मणिपुर में हिंसा जारी, घर में घुसकर महिला की गोली मार हत्या, चेहरा बिगाड़ा, 5 दिन बढ़ा इंटरनेट बैन
manipur violence3 मई से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच शुरू हुई हिंसा की आग अभी भी शांत होने का नाम नहीं ले रही है। मणिपुर के इंफाल पूर्वी जिले के सावोमबुंग इलाके में एक महिला की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या के बाद उग्रवादियों ने उसका चेहरा भी बिगाड़ दिया गया। अधिकारियों ने यहां यह जानकारी दी। उनके मुताबिक करीब 50 साल की एक महिला को उसके घर पर कुछ हथियारबंद उपद्रवियों ने चेहरे पर गोली मार दी। मणिपुर में हिंसा का दौर अभी भी जारी है और इंटरनेट बैन अगले पांच दिन तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
मारिंग नगा समुदाय की महिला थी
यहां तैनात अधिकारियों ने बताया कि जहां पर घटना हुई उसके आसपास रहने वाले लोगों के बयान रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि महिला को किसी बीमारी से पीड़ित थी। वह मारिंग नगा समुदाय से संबंध रखती थी। नए आदेश के मुताबिक राज्य में 20 जुलाई तक इंटरनेट बैन रहेगा।
तीन ट्रकों को भी जलाया
महिला को गोली मरने के बाद उपद्रवियों ने मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिले में तीन खाली ट्रकों को भी आग के हवाले कर दिया। सुरक्षाबलों ने बताया कि यह घटना सेकमाई पुलिस थानाक्षेत्र के अवांग सेकमाई में हुई। रसोई गैस सिलेंडर ढ़ोनेवाले ये तीनों ट्रक खुले मैदान में खड़े थे, जहां उनमें आग लगा दी गई। पुलिस ने कहा कि घटना के पीछे जो लोग हैं उनकी अभी पहचान नहीं की जा सकी है और यह तुरंत स्पष्ट नहीं है कि ट्रकों में आग क्यों लगाई गई। आरोपियों की तलाश जारी है।
भारतीय सेना ने की थी AFSPA की मांग
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा के बीच सेना ने AFSPA (आर्म्ड फोर्स स्पेशल प्रोटेक्शन एक्ट) की मांग की थी। मणिपुर में भारतीय सेना और असम राइफ़ल की टुकड़ियां मौजूद हैं। लेकिन AFSPA ना होने की वजह से सेना मणिपुर में लॉ एंड ऑर्डर सम्भाल तो रही हैं लेकिन कोई एक्शन नहीं ले पा रही है। इसलिए इसकी मांग की जा रही है।
मणिपुर में जारी जातीय हिंसा में 140 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 3000 लोग घायल हैं। हालात पर काबू पाने के लिए मणिपुर में इस समय मुख्यमंत्री के कहने के बाद 3 मई से लेकर अभी तक भारतीय सेना और असम राइफ़ल की कुल मिलाकर 123 टुकड़ियां तैनात की गई हैं। लेकिन आर्म्ड फोर्स स्पेशल पॉवर एक्ट (AFSPA) ना होने की वजह से पूरी ताकत के साथ सेना मणिपुर में लॉ एंड ऑर्डर सम्भाल तो रही हैं लेकिन कोई कड़ा एक्शन नहीं ले पा रही।
यह भी पढ़ें: गवाही देने वाली महिला पहलवानों को धमका रहे थे बृजभूषण, रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
पूरा मामला जानिए
बता दें कि, अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च के आयोजन के बाद पहली बार 3 मई को झड़पें हुई थीं। मेइती समुदाय मणिपुर की आबादी का लगभग 53 प्रतिशत हैं और ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। जनजातीय नागा और कुकी जनसंख्या का 40 प्रतिशत हिस्सा हैं और पहाड़ी जिलों में निवास करते हैं। राज्य में शांति बहाल करने के लिए करीब 10,000 सेना और असम राइफल्स के जवानों को तैनात किया गया है।
लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद भी कोई सुधार देखने को नहीं मिल रहा है, जिस कारण आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब तक इस हिंसा में 140 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 3000 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। केंद्र की मोदी और राज्य की बिरेन सरकार अब तक इस मसले पर पूरी तरह विफल दिखी है।
यह भी पढ़ें: महिला पहलवानों के छाती और पेट छूने के आरोपों पर बृजभूषण बोले- मैं तो बस योग...
Published on:
16 Jul 2023 10:27 am
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
