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Mutual Fund की इस श्रेणी में आया 70,072 करोड़ रुपए का निवेश, अब फंड मैनेजर कर रहे सचेत

Mutual Fund: 2.27 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया एक साल में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में, इनमें 31% निवेश अकेले सेक्टोरल-थीमैटिक फंड्स में, लार्जकैप फंड्स में केवल 1717 करोड़ रुपए हुआ निवेश

नई दिल्लीJun 26, 2024 / 02:14 pm

Anish Shekhar

Mutual Fund: शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। ऐसे समय में जब निवेशक सेक्टोरल-थीमैटिक फंड्स में जमकर निवेश कर रहे हैं। पिछले एक साल में म्यूचुअल फंड की इस श्रेणी में 70,072 करोड़ रुपए का निवेश आया, जो इक्विटी फंड्स में आए कुल निवेश का 31% है। थीम और सेक्टर आधारित इन फंड्स में आए भारी निवेश ने फंड मैनेजर्स को चिंता में डाल दिया है। क्योंकि इन फंड्स में काफी अधिक जोखिम होता है। इन फंड्स के साइक्लिक होने से इनमें एंट्री और एग्जिट करने का एक सही समय होता है, लेकिन खुदरा निवेशकों को इसकी जानकारी नहीं है और वे अधिक रिटर्न पाने के लिए रिस्क को समझे बिना इनमें निवेश कर रहे हैं।

फंड मैनेजर कर रहे सचेत

फंड मैनेजर्स छोटे निवेशकों को सेक्टोरल-थीमैटिक फंड्स में निवेश को लेकर सचेत कर रहे हैं। उनका कहना है कि खुदरा निवेशकों को अभी इस श्रेणी के नए फंड्स (एनएफओ) में निवेश नहीं करना चाहिए। इसके बदले वे लार्जकैप फंड्स या अच्छी तरह डायवर्सिफाइड दूसरे फंड्स में निवेश करें। उनका कहना है कि जो निवेशक सेक्टोरल-थीमैटिक फंड्स में ही निवेश करना चाहते हैं, वे लंबी अवधि के लिए अभी मैन्युफैक्चरिंग फंड्स में निवेश कर सकते हैं।
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रटर्न-जोखिम दोनों अधिक: मेहता निवेश सलाहकार कार्तिक झवेरी का कहना है कि थीमैटिक और सेक्टोरल फंड हर किसी के लिए नहीं हैं। ये फंड कुछ सेक्टर या थीम पर उम्मीदें टिकाए रखते हैं। ऐसे में सतर्क रहकर ही निवेश करें। वहीं फाइनेंश्यिल एक्सपर्ट विजय मंत्री ने बताया कि इन फंड्स में लोगों की रुचि की वजह अधिक रिटर्न है, लेकिन इनमें जोखिम भी सबसे अधिक है। चूंकि ये फंड साइक्लिकल हैं, इसलिए निवेशकों को सेक्टर की डायनामिक्स पर नजर रखने और अपने निवेश का समय तय करने में कुशल होना चाहिए। सेक्टोरल फंड्स में केवल आक्रामक निवेशकों को ही निवेश करना चाहिए। अगर निवेशक में ऐसी स्किल नहीं है या वे वित्तीय सलाहकार से सलाह लिए बिना निवेश करते हैं तो इसमें नुकसान हो सकता है।

मैन्युफैक्चरिंग फंड्स के लिए अनुकूल समय

प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं चीन 1 की नीति पर चलते हुए आपूर्ति को जोखिम से परे रखने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में भारत के पास उनके लिए उत्पादन का पसंदीदा ठिकाना बनने का मौका है। भारत सरकार भी विनिर्माण क्षेत्र पर काफी ध्यान दे रही है। महिंद्रा मैन्युलाइफ के रंजीत शिवराम ने कहा, सरकार ने अगले तीन से चार साल में देश के कुल जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र का योगदान बढ़ाकर 25त्न करने का लक्ष्य रखा है। इससे मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े शेयरों में तेजी आने की उम्मीद है। लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले और जोखिम से बिल्कुल भी परहेज नहीं करने वाले इन फंडों में रकम लगा सकते हैं।

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