
Diya Kumari
दिया कुमारी, उप-मुख्यमंत्री, राजस्थान
Nari Shakti Vandan Adhiniyam: आज देश एक ऐसे सामाजिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहाँ विकास की अवधारणा निरंतर विस्तृत हो रही है। अब प्रगति का अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि समान अवसर, सामाजिक न्याय और समावेशी भागीदारी भी बन गया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी व्यापक परिवर्तन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरा है।
Narendra Modi के नेतृत्व में पारित यह अधिनियम महिलाओं को शासन व्यवस्था में सशक्त और प्रभावी भागीदारी देने का मार्ग प्रशस्त करता है। यह उन्हें केवल योजनाओं के लाभार्थी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करता है।
इस अधिनियम की एक प्रमुख विशेषता इसकी स्पष्ट और व्यवहारिक क्रियान्वयन योजना है। 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर इसे लागू करने की दिशा तय की गई है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि यह पहल केवल घोषणा बनकर न रह जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू हो। यही व्यवस्था राज्य विधानसभाओं में भी लागू होगी, जहाँ महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलेगा।
राजस्थान सदैव से नारी शक्ति के साहस और योगदान का साक्षी रहा है। यहाँ महिलाओं को अवसर मिलने पर उन्होंने शासन को अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और जनोन्मुख बनाया है। पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण इसका सशक्त उदाहरण है, जिसने लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत किया है।
अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से भी यह स्पष्ट हुआ है कि महिला नेतृत्व सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में उनकी प्राथमिकता समाज के समग्र विकास को सुनिश्चित करती है।
यह अधिनियम तीन महत्वपूर्ण स्तंभों - निर्णय क्षमता, स्वायत्तता और अवसरों तक समान पहुँच - पर आधारित है। यह सुनिश्चित करता है कि महिलाएँ केवल भागीदारी तक सीमित न रहें, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका में आगे बढ़ें।
राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ‘लाड़ो प्रोत्साहन’ और ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाएँ पहले से ही महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं। अब यह अधिनियम उन्हें राजनीतिक नेतृत्व का सशक्त आधार भी प्रदान करेगा।
यह समय है कि हम एक ऐसे समाज की दिशा में आगे बढ़ें, जहाँ नेतृत्व का आधार लिंग नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और उत्तरदायित्व हो। यह केवल अधिकारों का विस्तार नहीं, बल्कि विश्वास, सहभागिता और सशक्तिकरण का नया अध्याय है।
यह पहल हर उस बेटी के सपनों से जुड़ी है, जो प्रदेश के कोने-कोने तक अपनी पहचान और नेतृत्व स्थापित करना चाहती है। जब महिलाएँ आगे बढ़ती हैं, तो वे केवल अपनी नहीं, बल्कि पूरे समाज की आवाज बनती हैं और यही आवाज एक सशक्त, समावेशी और विकसित राष्ट्र की आधारशिला रखती है।
Updated on:
13 Apr 2026 09:31 pm
Published on:
13 Apr 2026 08:38 pm
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