Nepal PM"s India Visit: नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' चार दिवसीय भारत दौरे पर आए हैं। इस दौरे के दौरान उनकी भारत-नेपाल संबंधों को मज़बूत करने की कोशिश रहेगी। पर एक देश ऐसा भी है जिसको नेपाल के पीएम के भारत दौरे से परेशानी हो सकती है।
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' (Prime Minister Of Nepal Pushpa Kamal Dahal 'Prachanda') भारत दौरे (India Visit) पर देश आ गए हैं। नेपाल के पीएम का यह दौरा चार दिन का होगा। नेपाल के पीएम पुष्प कमल के दिसंबर 2022 में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद यह पहला भारत दौरा है। भारत और नेपाल दोनों पडोसी देश हैं। पिछले कुछ सालों में भारत के दुनियाभर में बढ़ते प्रभाव से हर कोई वाकिफ है। दुनियाभर में भारत का कद तेज़ी से बढ़ रहा है। ऐसे में नेपाल के पीएम का भारत दौरा इस बात को दर्शाता है कि वह भारत से संबंधों को मज़बूत करना चाहते हैं। पर उनके इस कदम से एक देश ऐसा भी है जिसे परेशानी हो सकती है।
चीन की बढ़ सकती है टेंशन
नेपाल के पीएम ने अपने भारतीय दौरे पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Of India Narendra Modi) से भी मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने कई अहम मुद्दों पर बातचीत की और भारत-नेपाल संबंधों को मज़बूत करने के साथ ही कई योजनाओं पर भी चर्चा की। नेपाल के पीएम का यह भारत दौरा चीन की टेंशन बढ़ा सकता है। चीन नहीं चाहेगा कि भारत और नेपाल के संबंध मज़बूत हो। ऐसे में नेपाल के पीएम का यह फैसला चीन की टेंशन ज़रूर बढ़ाएगा।
चीन की नाराज़गी बढ़ने की भी है संभावना
चीन की टेंशन के साथ ही नाराज़गी भी बढ़ सकती है। इसकी वजह है एक एक ऐसा फैसला जो नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल (President Of Nepal Ram Chandra Poudel) ने लिया है। दरअसल नेपाली पीएम के भारत दौरे से कुछ घंटे पहले ही नेपाली राष्ट्रपति ने देश के नागरिकता कानून में एक संशोधन को अपनी सहमति दे दी है। इस संशोधन से नेपालियों से शादी करने वाले विदेशियों को राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ तुरंत नागरिकता भी मिल जाती है।
चीन हमेशा से ही नेपाल के इस कानून का विरोध करता रहा है और इसमें संशोधन के खिलाफ रहा है। चीन के प्रभाव के चलते ही अब तक नेपाल के नागरिकता कानून में संशोधन नहीं किया गया था। चीन के इस कानून के विरोध की वजह है इस कानून से तिब्बती शरणार्थियों के परिवारों को नागरिकता और संपत्ति का अधिकार मिलना।
ऐसे में नेपाल के प्रधानमंत्री का भारत दौरा और नेपाल के राष्ट्रपति का देश के नागरिकता कानून में संशोधन करने से चीन की टेंशन के साथ ही नाराज़गी भी बढ़ सकती है।
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