
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रहस्यमयी मौत के साथ ही कई अनसुलझे सवालों के जवाब भी दफ़न हो गए। सरकार, सियासी नेताओं और बोस के परिजनों के बीच उनकी मौत की गुत्थी को सुलझाने की कई कोशिशें भी हुई, लेकिन अब तक किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका। जब भी सुभाष चंद्र बोस की जयंती या उनकी पुण्यतिथि आती है तो फिर से उनकी संदिग्ध मौत को लेकर इसी तरह के अनसुलझे सवाल खड़े हो जाते हैं।
बहरहाल, नेताजी को लेकर बीते कुछ सालों में रुक-रुककर कई तरह के खुलासे और दावे हुए। उन्ही में से एक रहा वरिष्ठ पत्रकार अनुज धार की किताब में किये गए खुलासे का। इस खुलासे में कहा गया कि 1950 से लेकर 1980 के दशक तक नेताजी एक गुमनाम साधु के रूप में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में रहे थे। इस बात का जिक्र उन्होंने एक किताब में किया है।
टॉप सीक्रेट फाइल में छिपा था बोस का राज
नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को लेकर पूर्व पत्रकार अनुज धर की किताब 'व्हॉट हैपंड टू नेताजी' में बताया गया कि 1950 से लेकर 1980 के दशक तक नेताजी एक गुमनाम साधु के रूप में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में रहे थे।
अनुज धर ने बताया कि सरकार के एक बड़े अधिकारी ने उन्हें बताया कि भारत के प्रधानमंत्री के पास एक टॉप सीक्रेट फाइल थी, जिसमें बोस के बारे राज छिपा हुआ था।
केंद्रीय मंत्री और इंटेलिजेंस अफसर थे संपर्क में
अनुज धर ने बताया कि पीएम के पास मौजूद उस फाइल में लिखा था कि उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने वाले साधू भगवनजी असल में सुभाष चंद्र बोस थे। किताब में दावा किया गया है कि तत्कालीन यूपी सरकार, केंद्रीय मंत्री और खुफिया विभाग के कई अफसर बोस के संपर्क में थे और जरुरत पड़ने पर उनसे सलाह-मशवरा लेते रहते थे।
नेताजी को सोवियत संघ में नहीं मारा गया
किताब में खुलासा किया गया कि भगवनजी के दांत के डीएनए की जांच के नतीजों में अधिकारियों ने हेरफेर किया था। साथ ही उस दावे को भी खारिज किया गया, जिसमें कहा गया था नेताजी को तत्कालीन सोवियत संघ में मारा गया था। उन्होंने कहा कि सोवियत संघ (वर्तमान में रुस) ने तो उन्हें शरण दी थी।
Published on:
23 Jan 2017 09:35 am
