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52 साल बाद चांद पर उतरा अमरीका, ‘ओडीसियस’ उतारकर रचा इतिहास, हिंदू गुरु का संदेश लेकर लैंडिंग

अमरीकी कंपनी इंट्यूटिव मशीन्स के ‘ऑडीसियस’ नाम के लैंडर ने शुक्रवार तडक़े 4:53 बजे चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर लैंडिंग की। यह वही हिस्सा है, जहां भारत के चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर उतरा था।

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पहली बार एक प्राइवेट कंपनी ने चांद पर स्पेसक्राफ्ट उतारकर इतिहास रच दिया है। अमरीकी कंपनी इंट्यूटिव मशीन्स के ‘ऑडीसियस’ नाम के लैंडर ने शुक्रवार तडक़े 4:53 बजे चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर लैंडिंग की। यह वही हिस्सा है, जहां भारत के चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर उतरा था। यानी भारत के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव में लैंडिंग करने वाला अमरीका दूसरा देश बन गया है। करीब आधी सदी बाद अमरीका का कोई अंतरिक्ष यान चांद पर उतरा है। उसके 1972 के अपोलो मिशन के बाद कोई अमरीकी यान चांद पर नहीं पहुंचा था। दिलचस्‍प बात यह है कि ‘ऑडीसियस’ यान के एक हिस्से में हिंदुओं के आध्यात्मिक गुरु प्रमुख स्वामी महाराज का चित्र लगा है। वह हिंदू गुरु का संदेश लेकर चंद्रमा पर पहुंचा है।


हालांकि ‘ऑडीसियस’ (इसे ‘ऑडी’ भी कहा जा रहा है) मिशन प्राइवेट कंपनी का है, नासा ने उपकरणों और टेक्नोलॉजी के जरिए इसमें साझेदारी की। ‘ऑडीसियस’ यान को नासा के सहयोग से ही बनाया गया। इसे 15 फरवरी, 2024 को लॉन्च किया गया था। आठ दिन के सफर के बाद लैंडिंग के सिग्नल की पुष्टि मिलते ही मिशन के डायरेक्टर डॉ. टिम क्रेन ने कहा, ऑडीसियस को अपना नया घर मिल गया है। इंट्यूटिव मशीन्स के सीईओ स्टीव एल्टेम्स ने कहा, यह मुश्किल था, लेकिन हम चांद की सतह पर हैं। हम ट्रांसमिट कर रहे हैं। चांद पर आपका स्वागत है। नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने वीडियो संदेश में बधाई देते हुए कहा, हमने फिर चांद पा लिया।

ऑडीसियस छह पैरों वाला रोबोट लैंडर है। इसके साथ भेजे गए नासा के पेलोड चांद की सतह के साथ-साथ अंतरिक्ष मौसम, रेडियो खगोल विज्ञान का डेटा बटोरेंगे करेंगे। नासा का लक्ष्य इंसान को फिर चांद पर भेजने का है। इस लिहाज से यह मिशन काफी महत्त्वपूर्ण है। ऑडीसियस से एक महीने पहले एक अन्य प्राइवेट कंपनी एस्ट्रोबोटिक टेक्नोलॉजी का मिशन फेल हो गया था। लॉन्चिंग के बाद इसके पेरेग्रीन लैंडर में लीकेज की समस्या पैदा हुई। यह धरती की कक्षा में लौटकर जल गया था।


1. लैंडिंग से पहले करीब 80 मिनट बेहद रोमांचक रहे। पहले ऑडीसियस तडक़े 4:20 बजे लैंडिंग करने वाला था। नासा के मुताबिक लैंडिंग से पहले इसके नेविगेशन सिस्टम में कुछ खराबी आई थी।
2. वैज्ञानिकों को लगा कि शायद स्पेसक्राफ्ट नीचे गिर गया है। अब इससे संपर्क नहीं हो पाएगा, लेकिन कुछ देर बाद स्पेसक्राफ्ट से सिग्नल मिलने लगे। यह चांद की सतह की तरफ बढ़ता नजर आया।
4. लैंडिंग से पहले यान की रफ्तार बढ़ गई थी, इसलिए इसने चांद का एक अतिरिक्त चक्कर लगाया। इस चक्कर के कारण लैंडिंग के समय में बदलाव हुआ।
5. जैसे ही स्पेसक्राफ्ट ने चांद की सतह को छुआ, नासा और कंपनी के वैज्ञानिक झूम उठे। मिशन के डायरेक्टर टिम क्रेन ने कहा, हम बिना शक कह सकते हैं कि ऑडिसियस चांद की सतह पर है।


ऑडीसियस मून मिशन का मकसद चांद की सतह की धूल की स्टडी करना है। अपोले मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया था कि वहां काफी धूल है। इससे उनके उपकरण खराब हो गए थे। वैज्ञानिक जानना चाहते हैं चांद पर ग्रैविटी नहीं होने के बावजूद स्पेसक्राफ्ट उतरने पर वहां धूल कैसे उड़ती है और कैसे सतह पर लौटती है।


यह घटनाक्रम अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी के लिहाज से अहम है। भारत समेत कई देशों में इस क्षेत्र में निजी कंपनियों को मौका दिया जा रहा है। भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा विदेशी कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए दो दिन पहले ही प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) के नियमों में छूट की घोषणा की है। इसरो स्टार्टअप और छोटी कंपनियों को अपने साथ जोड़ रहा है। उपग्रह और रॉकेट निर्माण के काम के लिए इसरो निजी कंपनियों को छोटे-छोटे समूह (कंसोर्टियम) बनाने को बढ़ावा दे रहा है, ताकि वह खुद शोध और विकास पर ध्यान लगा सके। उपग्रह और रॉकेट निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो, गोदरेज और अनंत इंडस्ट्रीज समेत करीब 500 निजी कंपनियों की पहचान की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी कंपनियां अंतरिक्ष सेवाओं के विकास में नवाचार ला सकती हैं। इन सेवाओं की मांग भारत के साथ दुनियाभर में बढ़ रही है। ज्यादातर क्षेत्रों में उपग्रह आंकड़ों, इमेजरी और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा निजी कंपनियां अंतरिक्ष यान के लिए ग्राउंड स्टेशनों की स्थापना में सहयोग कर सकती हैं।

संभावनाओं के नए द्वार...
मानव इतिहास में पहली बार किसी प्राइवेट कंपनी ने चांद का सफर कामयाबी के साथ पूरा किया है। इससे प्राइवेट कंपनियों के लिए संभावनाओं के नए दरवाजे खुल गए हैं।


ऑडीसियस यान में हिंदू गुरु का संदेश भी...
‘ऑडीसियस’ यान के एक हिस्से में हिंदुओं के आध्यात्मिक गुरु प्रमुख स्वामी महाराज का चित्र लगा है। उनकी शिक्षाओं का संक्षिप्त जिक्र भी है। इंट्यूटिव मशीन्स के मुताबिक मानवीय मूल्यों में गहरी आस्था और निस्वार्थ सेवाओं के लिए यह बाप्स स्वामीनारायण संस्था के पांचवें गुरु को श्रद्धांजलि है।