
Old tax regime Vs New tax regime: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। कई टैक्सपेयर्स ने आइटीआर फाइल करना भी शुरू कर दिया है। हालांकि टैक्स एक्सपर्ट नौकरीपेशा लोगों को 15 जून के बाद ही आइटीआर फाइल करने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि आयकर विभाग ने अभी फॉर्म 16 जारी नहीं किया है। साथ ही पूरी तरह अपडेटेड फॉर्म 26एएस भी 15 दिन के बाद ही जारी होने की उम्मीद है। बिना फॉर्म 16 के आइटीआर फाइल करने पर आंकड़ों में गड़बड़ी होने की गुंजाइश रहती है, जिससे आयकर विभाग नोटिस भेज सकता है।
जो टैक्सपेयर वित्त वर्ष 2023-24 (असेसमेंट ईयर 2024-25) के लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत अपना आइटीआर भरना चाहते हैं, उन्हें हर हाल में 31 जुलाई, 2024 तक आइटीआर दाखिल करना होगा। इसमें चूकने पर पुरानी टैक्स व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा और नई टैक्स प्रणाली (न्यू टैक्स रिजीम के आधार पर इनकम टैक्स की गणना की जाएगी। यानी 31 जुलाई की डेडलाइन के भीतर आयकर रिटर्न दाखिल करने पर ही पुरानी टैक्स व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
31 जुलाई की समयसीमा समाप्त होने के बाद टैक्सपेयर्स को जुर्माने के साथ विलंबित आइटीआर दाखिल करने का मौका दिया जाता है। इसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर होती है। अगर कोई टैक्सपेयर इस अवधि में आइटीआर दाखिल करता है तो उन पर न्यू टैक्स रिजीम के अनुसार ही इनकम टैक्स देय होगा। उन्हेें पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलने वाली टैक्स छूट और अन्य डिडक्शन का लाभ नहीं मिलेगा। इससे बचने के लिए कर विशेषज्ञों ने 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी है।
आयकर कानून के अनुसार, इस साल से न्यू टैक्स रिजीम डिफॉल्ट व्यवस्था है, यानी करदाता के लिए यह पहले से ही लागू है। यदि कोई वेतनभोगी करदाता ओल्ड टैक्स रिजीम को चाहता है तो उसे नए वित्त वर्ष की शुरुआत में अपने नियोक्ता को इस संबंध में सूचित करना होगा। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो वह अपने आप नई टैक्स व्यवस्था में आ जाएगा और इसके तहत तय इनकम टैक्स स्लैब के आधार पर उनके वेतन से टैक्स (टीडीएस) काटा जाएगा। उन्हें आयकर रिफंड का दावा करने के लिए उन्हें अगले वित्त वर्ष तक इंतजार करना होगा।
यदि कोई टैक्सपेयर अपने नियोक्ता को सूचित करने में विफल रहता है, तब भी आयकर रिटर्न दाखिल करते समय टैक्स सिस्टम को बदल सकता है। बशर्ते यह नियत तारीख के भीतर किया गया हो। टैक्स एक्सपट्र्स के अनुसार, अगर टैक्सपेयर को लगता है कि नई व्यवस्था के मुकाबले पुरानी व्यवस्था में उन्हें अधिक फायदा पहुंच रहा तो है तो वे रिटर्न फाइल करते समय इसे बदल सकता है। हर साल टैक्स व्यवस्था बदलने की सुविधा सिर्फ वेतनभोगियों के लिए है। कारोबारी या व्यापारी सिर्फ एक बार ही टैक्स रिजीम को बदल सकते हैं, हर साल नहीं।
Published on:
01 Jun 2024 09:34 am

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