script 80 के दशक में नक्सली बन उठाई बंदूक…लॉकडाउन में लोगों के लिए बनीं फरिश्ता, अब बनी मंत्री, जानिए सिताक्का की पूरी कहानी | Once became a Naxalite minister in Telangana, know who is Seethakka | Patrika News

80 के दशक में नक्सली बन उठाई बंदूक…लॉकडाउन में लोगों के लिए बनीं फरिश्ता, अब बनी मंत्री, जानिए सिताक्का की पूरी कहानी

locationनई दिल्लीPublished: Dec 07, 2023 07:13:03 pm

Submitted by:

Shivam Shukla

who is Seethakka: 1980 के दशक के आखिरी और 1990 के दशक की शुरुआत में एक नक्सली के रूप में हाथ में बंदूक थामकर उसी जंगल में काम करने के बाद, वह इलाके से अपरिचित नहीं थीं। एकमात्र अंतर यह था कि उनके हाथ में नक्सली के रूप में बंदूक नहीं ता बल्कि एक जननेता के नाते उनके हाथ में महामारी के दौरान वह भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं ले जाती थीं।

who is Seethakka
फोटो क्रेडिट ( द वीक )

Telangana Minister Seethakka: हैदराबाद के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में गुरुवार को कांग्रेस विधायक दल के नेता रेवंत रेड्डी ने सीएम पद की शपथ ली। इनके अलावा दस अन्य विधायकों ने भी शपथ ग्रहण की है, उनमें से एक नक्सली से विधायक बनीं अनसूया सितक्का का भी नाम शामिल है। सितक्का माओवादी से लेकर वकील, विधायक और अब तेलंगाना सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी हैं। आइए इनकी पूरी कहानी जानते हैं।

तीसरी बार बनीं विधायक

सितक्का जैसे ही शपथ ग्रहण करने के लिए मंच पर पहुंची, स्टेडियम में मौजूद लाखों लोगों ने ताली बजाकर उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान वो एक पल के लिए ठहर गईं और हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया। विधानसभा चुनाव 2023 में मुलुग विधानसभा सीट से तीसरी बार विधायक चुना गया है। बता दें कि यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।

नक्सली समूह की थीं कमांडर

सीताक्का कोया जनजाति से ताल्लुक रखती हैं और इन्होंने अपनी दसवीं की पढ़ाई के बाद ही एक नक्सली ग्रुप ज्वाइन कर लिया। इसके साथ ये ग्रुप का कमांडर भी बनीं। उन्होंने पुलिस के साथ कई मुठभेड़ों सामना किया और एक मुठभेड़ में अपने पति और भाई को भी खो दीं।

साल 1994 में सरकार के सामने किया सरेंडर

आंदोलन से नाराज होकर उन्होंने साल 1994 में माफी योजना के तहत पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। इसके साथ, सीताक्का के जीवन में एक नया अध्याय शुरू हो गया, उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और कानून की डिग्री हासिल की। इसके बाद वारंगल की एक कोर्ट में उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस की।

2004 में लड़ा पहला चुनाव

इसके बाद उन्होंने तेलगु देशम पार्टी का दामन थाम लिया और साल 2004 मुलुग विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ा। हालांकि, इस दौरान वो चुनाव हार गई थीं । इसके बाद साल 2009 में वह उसी निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में सफल रही जबकि साल 2014 के चुनाव में वह तीसरे पायदान पर रहीं।

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लॉकडाउन में किया था सराहनीय काम

इसके बाद उन्होंने 2017 में तेलुगु देशम पार्टी का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में टीआरएस ( वर्तमान में बीआरएस) की प्रचंड जीत के बावजूद वो अपनी सीट बचाने में कामयाब रहीं। 2019 और 2020 में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान उन्होंने अपने इलाके में सराहनीय काम किया था, जिसकी वजह से वो सुर्खियों में रही थीं।

2022 में पूरा कीं पीएचडी

गौरतलब है कि बीते साल अनसूया सितक्का ने उस्मानिया विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पीएचडी की उपाधि पूरी की हैं। उन्होंने ये उपाधि आदिवासियों के सामाजिक बहिष्कार और अभाव बाद भी प्राप्त की हैं। उन्होंने कहा, "लोगों की सेवा करना और ज्ञान हासिल करना मेरी आदत है। मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करना बंद नहीं करूंगी।"

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