
'रामविलास को नेता बनाने में मेरी भूमिका अहम, उन्हें चिराग से ज्यादा भरोसा मुझ पर था, तभी उन्होंने...' चाचा पारस ने खोले कई अहम राज
Chirag Pashupati Dispute: बीजेपी के तमाम प्रयासों के बाद भी पशुपति पारस और चिराग पासवान के बीच सुलह नहीं हो पा रही है। दरअसल रामविलास पासवान के निधन के बाद से शुरू हुआ बवाल अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसका घाटा इनदोनों नेता के साथ-साथ बीजेपी को भी झेलना पड़ सकता है। लंबे समय से दो नेताओं के बीच रामविलास पासवान की विरासत को हथियाने की लड़ाई जारी है। आज पटना में रामविलास पासवान पर लिखी एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में पशुपति पारस ने अपने आपको रामविलास पासवान का सच्चा वारिस बताया। 2024 के रण से पहले हाजीपुर से लोकसभा का चुनाव कौन लड़ेगा, इस मसले पर भी चाचा-भतीजा का विवाद रोज एक नए लेवल को छू रहा है। एक ओर भले ही चिराग पासवान अपने को रामविलास पासवान के पुत्र होने के नाते अपनी दावेदारी कर रहे हैं लेकिन पशुपति पारस भी किसी भी हाल में अपनी दावेदारी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
रामविलास को मुझसे बेहतर कोई नहीं जानता
कार्यक्रम में रामविलास पासवान पर चर्चा के दौरान पशुपति पारस ने कहा कि उनकी जीवनी के बारे में मुझ से ज्यादा कोई नहीं जानता। मुझ से जायदा उनकी सेवा किसी ने नहीं की। उन्होंने अपनी सारी जिम्मेदारी मुझे सौंप दी थी। मैं उनका सारा काम देखता था। उनकी पूरी जिम्मेदारी मुझ पर थी। हर सुख-दुःख में मैं उनके साथ था। मैं उनके दिए एक भी आदेश तो टालता नहीं था। पारस ने यहां तक कह दिया कि यदि वो आज देश के इतने बड़े नेता बने तो उसमे मेरी भूमिका अहम है।
मना करने के बावजूद भी मुझे हाजीपुर सीट से लड़ने को कहा
इस कार्यक्रम में पारस ने आगे कहा- मैं 1977 में पहली बार विधायक बना। 7 बार विधायक बना, MLC बना। राम विलास पासवान राज्यसभा में गए तो उन्होंने मुझे हाजीपुर से चुनाव लड़ने को कहा। तब मैंने कहा था कि भतीजे चिराग पासवान या भाभी को चुनाव लड़वा दीजिए लेकिन रामविलास पासवान ने मेरी बात नहीं मानी। उन्होंने कहा कि मुझे सिर्फ तुम पर ही भरोसा है। परिवार के सभी सदस्यों में मैं सबसे ज्यादा भरोसा तुम पर करता हूँ, इसलिए तुम हाजीपुर से चुनाव लड़ो और चिराग जमुई से चुनाव लड़ेगा। अब उनकी सौंपी सीट को मैं कैसे छोड़ दूं। अगले लोकसभा चुनाव में भी मैं यही से लडूंगा, चाहे कोई इस सीट के लिए अपना दावा ठोके इससे कुछ नहीं होता है।
पारस ने कहा कि मैं हमेशा कहता हूं रामविलास पासवान का असली उत्तराधिकारी मैं ही हूं। इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले भी मौजूद थे। उन्होंने भी स्वर्गीय राम विलास पासवान से जुड़ी पुरानी बातो का जिक्र कर उनकी याद ताजा की। उन्होंने कहा कि रामविलास जी 9 बार लोकसभा में रहे। हम लोगों ने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट बनाया था, मैं उसका वर्किंग प्रेसिडेंट था। रामविलास पासवान ने प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण की मांग को जोर-शोर से उठाया था। रामविलास पासवान बिहार के मुख्यमंत्री हो सकते थे लेकिन उन्होंने केंद्र की राजनीति को चुना। उन्होंने हमेशा गरीब और शोषित वर्ग के लोगों के लिए काम किया। हमेशा उनकी आवाज सदन में उठाते रहे।
Updated on:
30 Jul 2023 08:19 am
Published on:
29 Jul 2023 08:46 pm
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