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Patrika Exclusive: Kiran Bedi ने बताया कैसे महिलाएं ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं के जरीए बना सकती हैं अपने आप को सशक्त

Kiran Bedi | International Women's Day: पुदुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल और देश की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी ने बताया कि महिलाएं किन चुनौतियों का सामना कर रहीं है और कैसे वो सरकारी योजनाओं के जरिए अपने आप को सशक्त कर सकती हैं।

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भारत

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Anish Shekhar

Mar 08, 2025

Kiran Bedi | International Women's Day: महिला दिवस के खास मौके पर, पत्रिका ने एक ऐसी शख्सियत से बातचीत की, जिनका नाम सुनते ही साहस, संकल्प और समर्पण की तस्वीर उभर आती है। किरण बेदी - भारत की प्रथम महिला IPS अधिकारी, जिन्होंने पुरुष-प्रधान समाज की दीवारों को न सिर्फ चुनौती दी, बल्कि उन्हें ढहाकर नारी शक्ति की एक नई इबारत लिखी। पुलिस सेवा में अपने कठोर और करुणामयी नेतृत्व से लेकर राजनीति के चुनौतीपूर्ण मैदान तक, उनकी यात्रा हर उस महिला के लिए एक मशाल है जो अपने सपनों को सच करने की हिम्मत रखती है। इस खास बातचीत में, उन्होंने महिलाओ के विकास और उनकी चुनौतियों के बार में बताया। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पत्रिका डॉटकॉम के नेशनल टीम के अनीश शेखर ने पुदुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल और देश की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी से बात की।

सवाल- 2025 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का विषय “Accelerate Action” है, और भारत में हम महिलाओं के विकास में गति कैसे ला सकते हैं?

किरन बेदी- महिलाओं को सबसे पहले अपने हक जानने होंगे, सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, और उन्हें इन योजनाओं के बारे में जागरूक करने की जरूरत है ताकि विकास में गति मिले, साथ ही महिलाओं को इन तक पहुंचाने की जरूरत है। आप सही कहती हैं कि जागरूकता और पहुंच से ही यह संभव होगा। महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होने से वे इन योजनाओं का लाभ उठा सकेंगी, और इससे उनके विकास में तेजी आएगी।

सवाल- 2047 तक विकसित भारत के लिए प्रधानमंत्री का विजन है, इसमें महिलाओं की क्या भूमिका होगी?

किरन बेदी- इसमें महिलाओं का बड़ा योगदान होगा, आज की महिलाएं सशक्त हैं, लेकिन उन्हें अपने अधिकारों को जानने और ग्रामीण महिलाओं तक योजनाओं की पहुंच की जरूरत है, और लखपति दीदी जैसी योजनाएं उन्हें स्वरोजगार के मौके दे सकती हैं और पुरुष-प्रधान समाज में जगह बनाने में मदद कर सकती हैं। सशक्त महिलाएं ही इस विजन को पूरा करेंगी। अपने अधिकारों को समझकर और योजनाओं का लाभ लेकर वे स्वरोजगार के जरिए समाज में अपनी पहचान बना सकती हैं, जो भारत के विकास में अहम होगा।

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सवाल- भारत में चुनावी प्रणाली में 33% आरक्षण की चुनौतियों को आप कैसे देखते हैं, चुनावी दलों को इसके लिए क्या प्रयास करने चाहिए, और सियासत में महिलाओं की भागीदारी कैसे बढ़ सकती है?

किरन बेदी- आज के दौर में महिलाएं आगे आ रही हैं और समाज में भागीदारी निभा रही हैं, लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां हैं। यह सच है कि चुनौतियां मौजूद हैं, और समाज में उनकी बढ़ती भागीदारी के बावजूद रुकावटें भी हैं। हालांकि आज के दौर में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। पॉलिटिक्स में आकर महिलाएं बदलाव की लकीर खिच सकती है।

सवाल- भारत के ग्लोबल लीडर बनने में महिलाएं कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं?

किरन बेदी- महिलाओं के पास कई मौके हैं जहां वे खुद को साबित कर सकती हैं, वे बिजनेस वुमन के तौर पर स्थापित होकर भारत के विकास में योगदान दे सकती हैं, और सरकार की योजनाएं इसमें सेतु हो सकती हैं। महिलाएं अपने आस-पास के अवसरों का इस्तेमाल कर सकती हैं। बिजनेस वुमन बनकर वे भारत को आगे ले जा सकती हैं, और सरकारी योजनाएं उन्हें इस राह में सहारा दे सकती हैं।

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सवाल - आपकी जीवनी पर आधारित फिल्म "बेदी" पाइपलाइन में है, इसमें आपके जीवन का कौन सा नया पहलू सामने आ सकता है?

किरन बेदी- यह एक बायोपिक है जिसमें मेरी जर्नी को दिखाया जाएगा, मेरे जीवन की चुनौतियों को कहानी के रूप में पिरोया जाएगा, और यह धोनी, मिल्खा सिंह, मेरी कॉम जैसी फिल्मों की तरह होगी। हालांकि यह फिल्म मुझ पर बन रही हैं, लेकिन मेरा किरदार कौन निभाएगा इसकी मुझे जानकारी नहीं है।

सवाल- एक महिला होने के नाते आपके पूरे जीवन में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही है?

किरन बेदी- सबसे बड़ी चुनौती पुदुचेरी की उपराज्यपाल के रूप में आई, जहां मैं लोगों का काम करवाना चाहती थीं, लेकिन सरकार और राजनीति में कई लोग रोकना चाहते थे, और मुझे हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा ताकि लोगों को न्याय मिल सके। यह चुनौती बताती है कि लोगों के लिए काम करना कितना मुश्किल था। सरकार और राजनीति की रुकावटों के बावजूद कोर्ट के जरिए न्याय दिलाने की कोशिश की।

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