राहुल गांधी ने 'रेलवे निजीकरण' के खिलाफ ट्वीट करते हुए दावा किया है कि 151 ट्रेनों का निजीकरण कर दिया गया है, जिसको पीआईबी फैक्ट चेक ने झूठा बताया है। इस ट्वीट के साथ राहुल गांधी ने एक वीडियो भी शेयर किया है।
केंद्र की मोदी सरकार पर कई सरकारी कंपनियों का निजीकरण करने का आरोप लगता रहता है, जिसमें से एक भारतीय रेलवे भी है। इसको लेकर विपक्ष के कई नेताओं सहित कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष व सांसद राहुल गांधी लगातार निशाना साधते रहते हैं। इसी के तहत बीते दिन शनिवार को राहुल गांधी ट्वीट करते हुए कहा कि "12 लाख लोगों को रोजगार, 2.5 करोड़ देशवासियों की रोज सेवा देते हुए देश को जोड़ती है भारतीय रेल। प्रधानमंत्री रेलवे देश की सम्पत्ति है, इसे निजीकरण नहीं, सशक्तिकरण की जरूरत है। बेचो मत!"
इसके साथ ही राहुल गांधी ने एक वीडियो भी शेयर किया था, जिसमें वो भारत जोड़ो यात्रा के दौरान रेलवे के निजीकरण को लेकर लोगों से बातचीत करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उनमें से कुछ रेलवे संघ के सदस्य थे जो 'रेलवे प्रोवेटेशन' के खिलाफ एक ज्ञापन देने के लिए राहुल गांधी से मिलने आए थे।
PIB ने राहुल गांधी के दावे को बताया फर्जी
PIB फैक्ट चेक ने राहुल गांधी के ट्वीट का स्कीनशॉट शेयर करते हुए दावे को फर्जी बताया। पीआईबी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि "एक ट्वीट में फर्जी दावा किया जा रहा है कि भारतीय रेलवे की 151 ट्रेनों, रेलवे संपत्ति, स्टेशनों और अस्पतालों का निजीकरण कर दिया गया है। ये दावे पूर्णतः फर्जी एवं तथ्यहीन हैं। रेल मंत्रालय अपनी किसी संपत्ति का निजीकरण नहीं कर रहा है।"
रेलवे के निजीकरण का विरोध
राहुल गांधी के द्वारा शेयर किए हुए वीडियो में रेलवे यूनियन के सदस्यों ने कहा कि वे राहुल गांधी से मिले और उन्हें रेलवे के 'निजीकरण' के बारे में बताया। एक सदस्य ने कहा कि "भारतीय रेलवे के 170 साल के इतिहास में हमने निजीकरण के बारे में पहले कभी नहीं देखा या सुना है। हम निजीकरण का विरोध कर रहे हैं।"
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