
Natural Gas(AI Image-ChatGpt)
केंद्र सरकार ने देश के ऊर्जा सेक्टर में एक अहम फैसला लेते हुए प्राकृतिक गैस से जुड़ी व्यवस्था को आसान और तेज बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार का साफ कहना है कि वह भारत को धीरे-धीरे गैस आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना चाहती है, और इसके लिए अब जमीनी स्तर पर बदलाव शुरू हो चुके हैं। दरअसल, सरकार ने “नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026” लागू कर दिया है। यह आदेश लागू होते ही असर में आ गया है और इसका मकसद साफ है, गैस पाइपलाइन से जुड़े प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाना और निवेशकों के लिए रास्ता आसान करना।
अब तक कंपनियों को पाइपलाइन बिछाने या विस्तार करने के लिए कई तरह की मंजूरियों का इंतजार करना पड़ता था, जिसमें महीनों लग जाते थे। लेकिन नए नियम के बाद हर अनुमति के लिए एक तय समयसीमा होगी। अगर उस समय के भीतर जवाब नहीं आता, तो उसे अपने आप मंजूरी मिल जाएगी। इसे ही “डीम्ड क्लीयरेंस” कहा गया है। मतलब अब फाइलें अटकेंगी नहीं, काम रुकेगा नहीं।
सरकार ने प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ शुल्क और नियमों को भी एक जैसा करने की कोशिश की है। इससे कंपनियों को पहले से अंदाजा रहेगा कि उन्हें क्या करना है और कितना खर्च आएगा। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है और नए प्रोजेक्ट्स तेजी से शुरू हो सकते हैं।
सरकार ने अधिकृत कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि उन्हें पाइपलाइन बिछाने में किसी तरह की रुकावट न आए। यानी जमीन, रास्ता या अनुमति जैसी दिक्कतों को कम किया जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में गैस नेटवर्क जल्दी फैल सकेगा।
इस फैसले का असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। आम लोगों को भी इसका फायदा मिलेगा। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा घरों तक पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) पहुंचे।
रसोई में साफ ईंधन मिलेगा
सिलेंडर पर निर्भरता कम होगी
समय पर कनेक्शन मिलने की संभावना बढ़ेगी
सरकार का मानना है कि गैस का इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण कम होगा और देश की ऊर्जा जरूरतों को भी ज्यादा सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सकेगा। उद्योग, ट्रांसपोर्ट और घर तीनों में गैस का उपयोग बढ़ाना ही इसका बड़ा लक्ष्य है।
Published on:
25 Mar 2026 05:27 am
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