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राज्यों और मुख्यमंत्रियों के सहयोग से न्यू इंडिया का सपना हो सकता है साकार: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि न्यू इंडिया का सपना सभी राज्यों और मुख्यमंत्रियों के सहयोग और मिलेजुले प्रयास से ही साकार हो सकता है।

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kamlesh sharma

Apr 23, 2017

Niti Aayog

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि न्यू इंडिया का सपना सभी राज्यों और मुख्यमंत्रियों के सहयोग और मिलेजुले प्रयास से ही साकार हो सकता है। मोदी ने नीति आयोग की संचालन परिषद की तीसरी बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि एक मुख्यमंत्री के रूप में मैं इससे भलीभांति परिचित हूं कि न्यू इंडिया के सपने को सभी राज्यों और मुख्यमंत्रियों के मिलेजुले प्रयासों से ही साकार किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि टीम इंडिया रविवार को फिर से एक मंच पर आकर वैश्विक ट्रेंड में हो रहे बदलाव के लिए भारत को तैयार करने एवं उसके लिए उपाय बताने पर चर्चा करेगी। यह बैठक नीतियों और उसके कार्यान्वयन पर विचारों को आदान प्रदान करने का एक मौका भी है। उन्होंने कहा कि यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम भारत को आजादी के 75वें वर्षगांठ के अवसर पर वर्ष 2022 में किस रूप में देखना चाहते हैं और उस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किस तरह तेजी से आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद करते हुए कहा कि नीति आयोग ने नई ऊर्जा से भारत को बदलने के लिए कदम उठाए हैं।

पीएम ने सरकार, निजी क्षेत्र और सिविल सोसायटी के मिलकर काम करने की जरूरत बताते हुए कहा कि नीति आयोग एक सहयोगपूर्ण संघीय निकाय है और उसकी शक्ति विचार है न कि प्रशासनिक या वित्तीय नियंत्रण। उन्होंने कहा कि बजट और योजनाओं के अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्रियों को नीति आयोग के पास आने की जरूरत है। नीति आयोग सिर्फ सरकारी आंकडों पर भी काम नहीं करता है बल्कि इसमें बाहर के विशेषज्ञ, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ और युवा पेशेवर हैं तथा राज्य भी नीतियां बनाने में भागीदारी कर सकते हैं।

उन्होंने ई एनएएम का उदाहरण देते हुए कहा कि इसकी अंतिम नीति में राज्यों ने मुख्य भूमिका निभाई है। मोदी ने कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों के उप समूहों ने केन्द्र प्रायोजित स्कीमों, स्वच्छ भारत, कौशल विकास और डिजिटल भुगतान जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। मुख्यमंत्रियों के विचारों का महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि मुख्यमंत्रियों से केन्द्र प्रायोजित स्कीमों की सूची और शेयरिंग पैटर्न पर सुझाव मांगे गए और फंडिंग में दिक्कत के बावजूद सिफारिशों को तत्काल स्वीकार किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014-15 और 2016-17 के दौरान राज्यों के कुल फंड आवंटन में 40 फीसदी की बढोतरी हुई, जबकि केन्द्रीय योजनाओं के लिए फंड पहले के 40 फीसदी से घटकर 25 फीसदी पर आ गयी। उन्होंने राज्यों से पूंजीगत व्यय और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर व्यय बढाने का भी आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने बजट पेश करने की तारीख में किए गए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे वित्त वर्ष के प्रारंभ से ही कोष उपलब्ध हो जाएगा। पहले आम तौर पर संसद में बजट मई महीने में पारित हो पाता था और उसके बाद मानसून आ जाता था जिससे परियोजनाओं के लिए काम का अच्छा समय समाप्त हो जाता था। उन्होंने योजना एवं गैर योजना व्यय को समाप्त करने का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2011 में रंगराजन समिति ने यह सिफारिश की थी।

देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों को एक मंच पर आने का श्रेय देते हुए उन्होंने कहा कि वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर जीएसटी को लागू करने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्रियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि जीएसटी पर सर्वसम्मति का इतिहास में भी याद किया जाएगा क्योंकि यह सहकारी संघवाद का जीता जागता उदारहण है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी से एक राष्ट्र, एक आंकाक्षा और एक ²ढ संकल्प का भाव प्रदर्शित होता है। इस मौके पर उन्होंने राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराने पर चर्चा को भी आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग 15 वर्ष के दीर्घकालिक ²ष्टिकोण, सात वर्ष के मध्यकालिक रणनीति और तीन वर्ष के कार्य के एजेंडे पर काम कर रहा है। उन्होंने राज्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि इससे राज्यों को ही लाभ होगा।

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