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प्रशांत किशोर ने BJP की जीत के बताए 4 बड़े कारण, कांग्रेस को दे डाली ये नसीहत

राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में आए चुनावी नतीजों पर चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बड़ा बयान दिया है। बीजेपी को वोट मिलने के उन्होंने चार कारण बताए और विपक्षी दलों को कहा कि जब तक इसकी काट नहीं निकालेंगे तभी मोदी को हरा पाएंगे।

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जन सुराज यात्रा निकाल रहे चुनावी रणनीतिकार ने प्रशांत किशोर ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में से तीन राज्यों में भाजपा को मिली प्रचंड जीत के चार बड़े कारण बताए हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि भाजपा को विपक्षी दल हराना चाहते हैं, ऐसे में उन्हें सबसे पहले ये समझना होगा कि उनकी ताकत क्या है। जब तक आप उनकी ताकत को पूरी तरह समझकर उससे बेहतर प्रयास नहीं करेंगे, तब तक लोग आपके ऊपर विश्वास नहीं जताएंगे और आपको वोट नहीं देंगे। भाजपा को जो वोट मिलता है, वो मोदी के ग्राफ के ऊपर-नीचे होने से नहीं मिलता है।

क्या-क्या कारण बताए

दरभंगा के सिंहवाड़ा प्रखंड में पत्रकार से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि भाजपा को वोट मिलने के चार कारण हैं, जिसमें पहला हिंदुत्व है जो उनकी एक विचारधारा है, इससे जुड़ा हुआ एक बहुत बड़ा वर्ग भाजपा को इसलिए वोट करता है, क्योंकि उन्हें भाजपा के हिंदुत्व वाली विचाराधार पर यकीन है।

न्यू राष्ट्रवाद को दूसरा कारण बताते हुए कहा कि जो गांव-देहात में लोग सुनते हैं कि भारत विश्वगुरु बन गया है, पूरे विश्व में भारत की शान मोदी ने बढ़ा दी है। इस राष्ट्रवाद की भावना की वजह से भी भाजपा को वोट मिलता है।

केंद्र द्वारा लाई गई योजनाओं का जिक्र करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि एक बहुत बड़ा वर्ग केंद्र की योजनाओं के लाभार्थियों का है, जिसमें किसान सम्मान योजना और आवास योजना की धनराशि सीधे केंद्र सरकार लाभार्थियों को भेज रही है। और चौथा कारण उन्होंने संगठन को बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा का अपना संगठन है, उसकी जो संगठनात्मक और आर्थिक ताकत है, उससे भी बहुत फर्क पड़ता है।

विपक्ष को नसीहत

आगे विपक्ष को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा को हराने के लिए आपके पास उससे बेहतर मॉडल होना चाहिए। भाजपा के संगठन की जितनी ताकत है, उसके मुकाबले में अन्य पार्टियों का संगठन बेहतर होना चाहिए। जब तक इन चार में से तीन पर कम से कम आप बेहतर प्रयास नहीं करेंगे, तब तक आपको दस में से सात या आठ चुनावों में हार का सामना करना होगा। एक दो जगह जहां जीत हासिल हो भी जाती है, उसका कोई बहुत असर नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग केसीआर के खिलाफ वोट करना चाहते थे, वहां दल के रूप में कांग्रेस ही है, तो कांग्रेस को ही वोट दिया। ये इनकंबेंसी का वोट है।