
संसद में राजस्थान: सात मेडिकल कॉलेजों व एम्स जोधपुर में एनईएलएस कौशल केंद्र मंजूर
नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने राजस्थान के सात मेडिकल कॉलेजों व जोधपुर एम्स में राष्ट्रीय आपातकालीन जीवन रक्षक (एनईएलएस) कौशल केंद्रों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनमें से भरतपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के एनईएलएस केंद्र के लिए 1.40 करोड़ रुपए जारी भी किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य व परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने शुक्रवार को लोकसभा में उदयपुर के सांसद अर्जुनलाल मीणा के अतारांकित प्रश्न के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के मानव संसाधन विकास के लिए देशभर में भौगोलिक प्रतिनिधित्व के अनुसार ये कौशल केंद्र स्थापित किए जाते हैं।
राजस्थान में जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज, बीकानेर के एसपी मेडिकल कॉलेज, जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज, अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज, उदयपुर के आरएनटी मेडिकल कॉलेज तथा भरतपुर व कोटा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के साथ जोधपुर एम्स में भी कौशल केंद्र मंजूर किया गया है।
भीलवाड़ा समेत 23 नए मेडिकल कॉलेज
भीलवाड़ा के सांसद सुभाषचंद्र बहेड़िया के प्रश्न पर राज्यमंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने बताया कि बिना मेडिकल कॉलेज वाले अल्पसेवित व आकांक्षी जिलों को प्राथमिकता देते हुए मौजूदा जिला या रेफरल अस्पतालों से जुड़े नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए चलाई जा रही केंद्र प्रायोजित योजना के तहत भीलवाड़ा सहित प्रदेश में 23 मेडिकल कॉलेजों का अनुमोदन किया गया गया है। योजना में केंद्र व राज्य सरकार 60:40 के अनुपात में वित्त पोषण किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत बीकानेर, उदयपुर, कोटा व जयपुर मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलियटी ब्लॉक की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता दी गई है।
जैसलमेर-कांडला रेलमार्ग
पोत परिवहन व जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने जालोर-सिरोही के देवजी एम. पटेल को लिखित जवाब में कहा कि रेल मंत्रालय ने जैसलमेर-बाड़मेर-भवातड़ा को कार्गो परिवहन के लिए अपव्यवहार्य मानते हुए परियोजना को कार्यान्वित नहीं किया। इंडियन पोर्ट रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने जनवरी 2018 में 357.28 किमी लम्बे इस मार्ग पर परियोजना रिपोर्ट बनाई थी। इसकी अनुमानित लागत 1117.40 करोड़ रुपए है। रेलवे ने वर्ष 2012-13 में इस लिंक का सर्वेक्षण किया था, लेकिन प्रतिफल दर 7.74 फीसदी ऋणात्मक होने के कारण परियोजना क्रियान्वित नहीं की गई।
जजों की नियुक्ति में आरक्षण नहीं
साल 2018 से गत 17 जुलाई तक राजस्थान उच्च न्यायालय में नियुक्त 39 न्यायाधीशों में से 10 वकील कोटे से बनाए गए हैं। इनमें सात सामान्य श्रेणी के तथा एक-एक अनुसूचित जाति, अल्प संख्यक व ओबीसी वर्ग के हैं। विधि मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने नागौर के सांसद हनुमान बेनिवाल को लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संविधान में न्यायाधीशों की नियुक्ति में किसी जाति या व्यक्ति के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है, फिर भी सरकार इसमें सामाजिक विविधता के लिए प्रतिबद्ध है और कॉलेजियम से प्रस्तावों में यह विविधता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।
Published on:
21 Jul 2023 07:46 pm

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