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राम आस्था हैं, राम आधार हैं…, 32 साल पुराना प्रण पूरा करने के बाद बोले पीएम मोदी

locationनई दिल्लीPublished: Jan 22, 2024 04:13:56 pm

Submitted by:

Shivam Shukla

Ram Mandir inauguration in Ayodhya: आज राम लला की दिव्य और नव्य प्रतिमा को देख पीएम मोदी क्या, भगवान राम के करोड़ो भक्त बस एकटक निहारे जा रहे हैं।

Ram Mandir inauguration in Ayodhya

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या राम मंदिर में भगवान राम लला की प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में मुख्य यजमान बनकर अपना 32 साल पुराना किया हुआ वादा पूरा किया है। दरअसल, 14 जनवरी 1992 को पीएम नरेंद्र मोदी राम जन्म भूमि पहुंचे थे। उस समय राम लला टेंट में विराजमान थे। उसी दिन उन्होंने प्रण किया कि वो अयोध्या दोबारा तब तक नहीं आएंगे, जब तक भव्य राम मंदिर का निर्माण नहीं करवा लेंगे।

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प्रण के ठीक 32 साल और 7 दिन बाद पीएम मोदी राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए मुख्य यजमान बनकर अयोध्या पहुंचे। उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान के बाद राम लला की मनमोहक मूर्ति की आरती उतारी। आज राम लला की दिव्य और नव्य प्रतिमा को देख पीएम मोदी क्या, भगवान राम के करोड़ो भक्त बस एकटक निहारे जा रहे हैं। विश्व के किसी भी कोने में आंख उठाकर देखा जाए तो, केवल राम लला नजर आ रहे हैं। विदेशों में सनातन धर्म, राम लला को मानने वाले भक्त आज राम के रस में डूबे हुए हैं। हर तरफ जय श्री राम के नारे की गूंज सुनाई दे रही है। वहीं, अयोध्या ऐसी सजी हुई है, मानों सोने की हो, अयोध्या के कण - कण में राम की अनुभूति हो रही है।

राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं...

पीएम मोदी प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान खत्म होने के तुरंत बाद लोगों को संबोधित किया। इसके अलावा उन्होंने राम मंदिर परिसर में मौजूद यटायू की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित की और राम मंदिर का निर्माण करने वाले मजदूरों के ऊपर पुष्पवर्षा कर उन्हें धन्यवाद किया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा,"राम भारत की आस्था हैं, राम भारत का आधार हैं, राम भारत का विचार हैं, राम भारत का विधान हैं, राम भारत की चेतना हैं, राम भारत का चिंतन हैं, राम भारत की प्रतिष्ठा हैं, राम भारत का प्रताप हैं, राम प्रभाव हैं, राम प्रवाह हैं, राम नेति भी हैं, राम नीति भी हैं, राम नित्यता भी हैं, राम निरंतरता भी हैं, राम व्यापक हैं, विश्व हैं, विश्वात्मा हैं इसलिए जब राम की प्रतिष्ठा होती है तो उसका प्रभाव शताब्दियों तक नहीं होता उसका प्रभाव हज़ारों वर्षों तक होता है।"

हर युग के लोगों ने राम को जीया है...

उन्होंने आगे कहा, "हर युग में लोगों ने राम को जीया है। हर युग में लोगों ने अपने-अपने शब्दों में, अपनी तरह से राम को अभिव्यक्त किया है। यह राम रस जीवन प्रवाह की तरह निरंतर बहता रहता है।"

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