
Ruchika molestation case
हरियाणा के पूर्व डीजीपी शंभू प्रताप सिंह राठौड़ को रुचिका गिरहोत्रा छेड़छाड़ मामले में मिली सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। पूर्व डीजीपी राठौड़ को घटना के 19 साल बाद सजा सुनाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि जो जेल की सजा राठौड़ ने काटी है, वो पर्याप्त है। ऐसे में अब उन्हें दोबारा जेल नहीं जाना होगा।
दरअसल, 22 दिसंबर 2009 को घटना के 19 साल के बाद निचली अदालत ने राठौड़ को धारा 354 आईपीसी (छेड़छाड़) का दोषी करार देते हुए छह महीने की कैद और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने बढ़ाकर 18 महीने कर दिया था।
क्या है पूरा मामला?
1990 में हरियाणा के पंचकुला में तत्कालीन आईजी एसपीएस राठौड पर 14 साल की रुचिका गिरहोत्रा से छेड़छाड़ का आरोप लगा था। 1993 में रुचिका गिरहोत्रा ने खुदकुशी कर ली थी।
इसके बाद राठौड़ के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और राज्य सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। राठौड़ ने हाईकोर्ट से मिली सजा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 11 नवंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व डीजीपी को को सशर्त जमानत दे दी थी।
Published on:
23 Sept 2016 12:48 pm
