
पिछले तीन महीने से मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। हिंसा में हजारों लोगों को अपना घर बार छोड़ना पड़ा हैं। अपने ही राज्य में ये लोग शरणार्थी बन कर रह गए हैं। आज इसी पूरे मामले को लेकर देश के सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही थी। इस दौरान CJI ने जातीय हिंसा से निपटने के राज्य सरकार के तरीके पर कड़ा रुख अख्तियार किया है और खासतौर पर महिलाओं को निशाना बनाने वाले अपराधों की पुलिस जांच को "धीमी" करार दिया है।
कानून व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है- चीफ जस्टिस
मणिपुर मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कोर्ट को यह आभास होता है कि "सरकारी मशीनरी इस तरह से खराब हो चुकी है कि आप एफआईआर भी दर्ज नहीं कर सके। राज्य पुलिस जांच करने में असमर्थ है। उन्होंने नियंत्रण खो दिया है। जब कोर्ट ने कहा कि 6,000 FIR में से केवल सात गिरफ्तारियां हुई है, तो मेहता ने स्पष्ट करना चाहा कि वायरल वीडियो मामले के संबंध में सात गिरफ्तारियां की गई हैं।
CJI की पीठ कर रही सुनवाई
मणिपुर हिंसा पर दायर याचिकाओं की सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ कर रही है। खंडपीठ ने राज्य सरकार से हत्या, बलात्कार, आगजनी, लूट, घर और संपत्ति, पूजा स्थलों को नुकसान और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले मामलों के बारे में सारणीबद्ध प्रारूप में जानकारी मांगी थी। इस पर मणिपुर सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उनका पक्ष रखा।
Published on:
02 Aug 2023 02:18 pm
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