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केंद्र ने दी सुप्रीम कोर्ट में 9 जजों की नियुक्ति को मंजूरी, देश को मिलेंगी पहली महिला चीफ जस्टिस

  सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ( Supreme Court Collegium ) की अनुशंसा वाले सभी नौ जजों के नाम पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या 33 हो गई है। अब शीर्ष अदालत में केवल एक जज का पद खाली है।

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ( Supreme Court Collegium ) की अनुशंसा वाले सभी नौ जजों के नाम पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। इनमें तीन महिला जजों के नाम भी शामिल हैं। इसी के साथ 2027 में देश को पहली महिला मुख्य न्यायाधीश ( 1st Woman CJI of India ) मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय से सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में प्रमोशन पाने वाली जस्टिस बीवी नागरत्ना देश की पहली महिला चीफ जस्टिस बन सकती हैं।

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक होता रहा तो अगले सप्ताह की शुरुआत में सभी नौ नए न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ले लेंगे।

ये हैं सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति पाने वाले नौ न्यायमूर्ति

केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court ) के जज के रूप में कर्नाटक के मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय में सर्वोच्च पदस्थ मुख्य न्यायाधीश एएस ओका, गुजरात के मुख्य न्यायाधीश विक्रम नाथ, सिक्किम के मुख्य न्यायाधीश जेके माहेश्वरी, तेलंगाना की मुख्य न्यायाधीश हिमा कोहली और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीटी रवि कुमार, मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश, गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पीएस नरसिंह का नाम शामिल है।

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17 अगस्त को हुई थी कॉलेजियम की बैठक

जजों का नाम तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में सीजेआई के अलावा जस्टिस यूयू ललित, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की बैठक 17 अगस्त को हुई थी। 34 जजों की स्वीकृत संख्या में से अभी सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 24 जज हैं। नौ नए जजों की नियुक्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट में केवल एक पर खाली रह गई है।

पहली बार एक ही प्रस्ताव में 3 महिला जजों की सिफारिश

इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक ही प्रस्ताव में तीन महिला न्यायाधीशों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप मे की है। महिला न्यायाधीशों में कर्नाटक उच्च न्यायालय से बीवी नागरत्ना जिन्हें पदोन्नत किया गया। वह 2027 में देश की पहली महिला सीजेआई ( 1st Woman CJI of India ) बन सकती हैं। इसे उच्चतम न्यायालयों में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर एक बड़ा संदेश भी माना जा रहा है।

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पीएस नरसिंह कॉलेजियम की पहली पसंद

वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिंह को सुप्रीम कोर्ट में सीधे पदोन्नति के लिए कॉलेजियम ( Supreme Court Collegium ) की पहली पसंद माना जा रहा है। उनकी सिफारिश न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ नरीमन की सेवानिवृत्ति के एक हफ्ते से भी कम समय बाद आई है। भारत के कानूनी इतिहास में पीएस नरसिंह पांचवें वकील जिन्हें सीधे बार से नियुक्त किया गया है।

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