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1993 बोबाजार धमाका मामले में नहीं रिहा होगा आरोपी राशिद खान, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक

Supreme Court Order: 1993 बोबाजार धमाका मामले में कुछ दिन पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी राशिद खान की रिहाई का फैसला सुनाया था, लेकिन आज सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर रोक लगा दी है।

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भारत

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Tanay Mishra

Jun 23, 2026

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

1993 बोबाजार धमाका (Bowbazar Blast) मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे मोहम्मद राशिद खान (Md. Rashid Khan) की रिहाई का फैसला कुछ दिन पहले ही दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने सुनाया था। दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की थी और आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए राशिद के जेल से बाहर आने का रास्ता बंद कर दिया है।

जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने सुनाया फैसला

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू की दलीलें सुनने के बाद यहआदेश दिया। एएसजी राजू ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की अपील की थी। सुनवाई के दौरान एएसजी राजू ने बताया कि 1993 का बोबाजार धमाका एक गंभीर आतंकी घटना थी, जिसमें 69 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे और बम धमाके की वजह से दो इमारतें भी ढह गई थीं। इन दलीलों पर गौर करते हुए जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से दायर स्पेशल लीव पिटिशन पर नोटिस जारी करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी।

क्या है बोबाजार धमाका मामला?

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बोबाजार इलाके में 16 मार्च 1993 को भीषण धमाका हुआ था, जिसमें 69 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे। इस धमाके में दो इमारतें भी ध्वस्त हो गईं थीं। राशिद पर TADA, IPC, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मुकदमा चला था और 2001 में उसे दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

कब से जेल की सज़ा काट रहा है राशिद?

77 वर्षीय राशिद 33 साल से ज़्यादा समय से जेल की सज़ा काट रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने उसकी रिहाई का फैसला सुनाते हुए कहा था कि आरोपी द्वारा भुगती गई सजा अपराध के प्रति समाज में ज़रूरी डर और संदेश स्थापित करने के लिए पर्याप्त रही है। इस दौरान जस्टिस नीना ने यह भी कहा था कि जेल की सज़ा काटते हुए राशिद के व्यवहार, पैरोल के दौरान उसके रिकॉर्ड और सुधार संबंधी रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि उसमें सुधार हुआ है।

क्या है बोबाजार धमाका मामला?

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के बोबाजार इलाके में 16 मार्च 1993 को भीषण धमाका हुआ था, जिसमें 69 लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे। इस धमाके में दो इमारतें भी ध्वस्त हो गईं थीं। राशिद पर TADA, IPC, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मुकदमा चला था और 2001 में उसे दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी। हालांकि धमाके के बाद ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था और सज़ा सुनाए जाने तक भी वह पुलिस की हिरासत में ही रहा था।

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