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देश में इस बार ज्यादा बरसा मानसून, तोड़ा 49 साल का रेकॉर्ड

मानसूनी सीजन के 92 दिन में से 40 दिन यानी हर दूसरे-तीसरे दिन में औसत से ज्यादा हुई बरसात साल 1971 से 2020 तक औसत बरसात 679.5 एमएम रही, साल 2025 में इस सीजन में 717.2 एमएम बरसे बादल कानाराम मुण्डियार. देश में साल 2025 की बारिश ने इस मानसून सीजन में पिछले 49 साल […]

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मानसूनी सीजन के 92 दिन में से 40 दिन यानी हर दूसरे-तीसरे दिन में औसत से ज्यादा हुई बरसात

साल 1971 से 2020 तक औसत बरसात 679.5 एमएम रही, साल 2025 में इस सीजन में 717.2 एमएम बरसे बादल

कानाराम मुण्डियार.

देश में साल 2025 की बारिश ने इस मानसून सीजन में पिछले 49 साल के औसत बरसात का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य-दक्षिण भारत तक नदियां व बांध उफान पर आ गए हैं। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक बाढ़ व जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। देश के 32 राज्यों में औसत बारिश का कोटा जुलाई माह में ही पूरा हो गया। अगस्त माह में मानसून का अतिरिक्त पानी बरस रहा है।

मानसूनी सीजन (एक जून से 30 अगस्त-तीन माह) में साल 1971 से 2020 यानी 49 साल में देश की औसत बारिश 679.5 एमएम रही। साल 2025 में इस सीजन के 28 अगस्त तक 717.2 एमएम बारिश दर्ज हुई। यानी देश में 38.2 एमएम (5.5 प्रतिशत) ज्यादा बरसात हो गई। देश में इस सीजन में 40 दिन तक यानी हर दूसरे-तीसरे दिन बादल औसत आंकड़े को पार करते हुए ज्यादा बरसे।

16 राज्य बाढ़ से प्रभावित-

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, नई दिल्ली, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व बिहार राज्य बाढ़ से प्रभावित हैं। इन राज्यों में पिछली बारिशों के सभी रेकॉर्ड टूट गए हैं। अत्यधिक बारिश से देश भर के बांध-जलाशय लबालब होकर खुशियां ला रहे हैं तो कई जगहों पर जानमाल के साथ कई तरह से बड़ी तबाही भी मची है। केदारनाथ में 2013 में विनाशकारी बाढ़ के बाद आक्रामक हुए मानसून ने उत्तर भारत में तबाही मचाते हुए 12 साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया। आइएमडी के अनुसार इस बार सीजन में उत्तर भारत में 21 बार अत्यधिक भारी बारिश के साथ सामान्य से 21 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई।

मानसूनी सीजन में बारिश : औसत से तुलना

-1 राज्य (लद्दाख) में अत्यधिक बारिश।

-8 राज्यों में अधिक बारिश

-23 राज्यों में सामान्य बारिश

-4 राज्यों में कम बरसात

प्रमुख राज्यों में बरसात की स्थिति

राज्य--- औसत बारिश (1971-2020)-- बारिश(2025)---औसत से अधिक प्रतिशत

राजस्थान- 361.3-- 564.8---56 प्रतिशत

मध्यप्रदेश-750.9---919.8---22 प्रतिशत

गुजरात--569.2--644.9---13 प्रतिशत

नई दिल्ली-426.2---589.3---38 प्रतिशत

महाराष्ट्र- --788.6--838.8---6 प्रतिशत

जम्मू-कश्मीर-441.6---552.3---25 प्रतिशत

लद्दाख----- 16.2---81.2--401 प्रतिशत

हिमाचल प्रदेश-598.4--785.2--31 प्रतिशत

उत्तराखंड--954.6---1088.3--14 प्रतिशत

पंजाब----358.8---440.01---24 प्रतिशत

छत्तीसगढ़--888.6---888.2-औसत पूरा

(आंकड़ा- 1 जून से 28 अगस्त तक-एमएम में)

इसलिए इतनी बारिश -

जलवायु परिवर्तन : वैश्विक तापमान बढऩे से समुद्र की सतह से वाष्प अधिक उठता है। जिससे बारिश तीव्र व असामान्य हो जाती है।

अलनीनो का प्रभाव : प्रशांत महासागर का सतही पानी अधिक गर्म हो जाने का प्रभाव भारत के मानसून पर पड़ता है।

लो-प्रेशर सिस्टम : बंगाल की खाड़ी व अरब सागर में लगातार कम दबाव से मानसून तंत्र ज्यादा सक्रिय हुआ।

जेट स्ट्रीम व हवा का पैटर्न : पश्चिमी विक्षोभ व मानसून की हवाओं में टकराव से बारिश की तीव्रता बढ़ी।

भौगोलिक स्थिति: पहाड़ी व नदी-घाटी वाले क्षेत्रों में बारिश ज्यादा केन्द्रित हो जाती है।