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लाखों नोटिस, लाखों लंबित मामले, बंगाल में SIR प्रक्रिया बनी बड़ी चुनौती

SIR Process in West Bengal: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन पर संकट गहराता दिख रहा है, क्योंकि SIR की प्रक्रिया बेहद धीमी है और लाखों नोटिस व सुनवाई अब भी लंबित हैं।

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बंगाल में SIR प्रक्रिया (AI Image)

West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चुनाव आयोग द्वारा राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया की रफ्तार बेहद धीमी नजर आ रही है, जिससे तय समयसीमा पर अंतिम मतदाता सूची जारी होना लगभग असंभव माना जा रहा है।

लाखों नोटिस अब भी अधूरे

चुनाव आयोग की अपनी रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में अब तक 65,78,058 SIR नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें से केवल 32,49,091 नोटिस ही मतदाताओं तक पहुंच पाए हैं, जबकि 33,28,967 नोटिस अब भी डिलीवर नहीं हो सके हैं। स्थिति यहीं नहीं रुकती। आयोग के आंकड़े बताते हैं कि 74,19,356 मामलों में अब भी सुनवाई लंबित है, जो इस प्रक्रिया की गंभीर सुस्ती को उजागर करता है।

डिलीवर नोटिसों में भी सुनवाई बेहद कम

जो नोटिस मतदाताओं तक पहुंचे हैं, उनमें से भी केवल करीब 40 प्रतिशत मामलों की ही सुनवाई पूरी हो पाई है। इसका साफ मतलब है कि चुनाव आयोग पर प्रशासनिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अगले एक महीने में इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

बड़े जिलों में हालात और भी खराब

उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नदिया जैसे बड़े और घनी आबादी वाले जिलों में नोटिस डिलीवरी और सुनवाई के आंकड़ों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। इन्हीं जिलों में चुनावी संवेदनशीलता भी सबसे ज्यादा मानी जाती है। हालात को संभालने के लिए चुनाव आयोग ने अतिरिक्त माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात करने और सुनवाई केंद्रों की संख्या बढ़ाने का दावा किया है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में 14 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करना बेहद कठिन है।

ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर दबाव

इसी बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले 72 घंटों में मुख्य चुनाव आयुक्त को लगातार दो पत्र लिखने के बाद अचानक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया दी। ममता बनर्जी ने कहा, “मैं प्रशासन से कहना चाहती हूं कि कानून का पालन करें और निडर होकर काम करें। डरने की कोई जरूरत नहीं है। जरूरत पड़ने पर मुख्य सचिव से संपर्क करें।” उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि अगर कहीं अवैध दस्तावेज या नकदी मिले तो तुरंत जब्त की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर चुकी है।

14 फरवरी की डेडलाइन

चुनाव आयोग ने 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की तारीख तय की है। लेकिन मौजूदा आंकड़े, लंबित सुनवाई और प्रशासनिक चुनौतियां यह संकेत दे रही हैं कि यह डेडलाइन आयोग के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मतदाता सूची का समय पर और पारदर्शी तरीके से तैयार होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए बेहद अहम है। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस चुनौती से कैसे निपटता है।


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