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क्या है अनुच्छेद 142, सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी हत्याकांड, भोपाल गैस काण्ड समेत राम मंदिर फैसले पर भी किया था इसका इस्तेमाल

Article 142: संविधान का Article 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए विशेष आदेश देने की शक्ति प्रदान करता है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए सरकार को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन अलग से देने का आदेश जारी किया था। 2022 में कोर्ट ने इसके जरिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में और भोपाल गैस त्रासदी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी अनुच्छेद से हस्तक्षेप किया था

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What is Article 142 ?

संविधान का Article 142 क्या है।

Article 142: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में हुई धांधली पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। SC ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए नतीजों को पलट दिया। आम आदमी पार्टी (AAP) के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को विजेता घोषित किया। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश भी दिया। जानते हैं कि ये अनुच्छेद 142 ( Article 142) क्या है और किन-किन मामलों में इसका इस्तेमाल हो सकता है।

संविधान का अनुच्छेद 142 क्या है

संविधान का Article 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए विशेष आदेश देने की शक्ति प्रदान करता है। अनुच्छेद 142 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट अपने अधिकार-क्षेत्र का प्रयोग करते हुए ऐसा आदेश पारित कर सकता है, जो उसके सामने लंबित किसी मामले या विषय में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक हो। बता दें कि इस अधिकार का प्रयोग करते हुए दिया गया आदेश अन्य मामलों के लिए एक नजीर नहीं बन सकता। इस अनुच्छेद की शक्ति विवेकाधीन है।

क्या हैं अनुच्छेद 142 की शक्तियां

इस अनुच्छेद की शक्तियां सीमित है। संविधान के जानकारों का मानना है कि कोर्ट इसका उपयोग करते समय कुछ सिद्धांतों का पालन करता है, जिनमें न्यायिक संयम और न्यायिक सक्रियता प्रमुख है। कोर्ट इस इस्तेमाल में कानूनी संस्थाओं की शक्तियों का सम्मान करता है और किसी कानूनी प्रावधान को खत्म या उसकी अवहेलना नहीं कर सकता। कोर्ट सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए इस अनुच्छेद की शक्तियों का उपयोग करता है।

अनुच्छेद 142 के पीछे की अवधारणा क्या है

अनुच्छेद 142 न्याय, समता और अच्छे विवेक की अवधारणा से लिया गया है। इसे किसी विशिष्ट कानून के अभाव में भारत में ब्रिटिश काल में 1935 में संघीय न्यायालयों में लागू किया गया था। इस विवेकाधीन अनुच्छेद के अनुसार कोर्ट कानून की सख्त व्याख्या से परे जाकर और अपनी समझदारी और रचनात्मकता का उपयोग करके इसके जरिए विवादों को सुलझा सकता है। 27 मई, 1949 को इसे संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।

कोर्ट ने कब किया इस अनुच्छेद का इस्तेमाल

साल 2019 में अयोध्या जमीन विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन को रामलला की माना था। राम मंदिर बनाने के लिए इसे ट्रस्ट को सौंपा था। इसमें मुस्लिम पक्ष के साथ अन्याय होता नजर आ रहा था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए सरकार को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन अलग से देने का आदेश जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी कई मामलों में अनुच्छेद 142 का प्रयोग कर चुका है। 2022 में कोर्ट ने इसके जरिए पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में और भोपाल गैस त्रासदी मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने इसी अनुच्छेद से हस्तक्षेप किया था।

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