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अब पड़ेगी कड़ाके की ठंड! इस राज्य में अचानक हुई बर्फबारी और कई जगह रिकॉर्ड तोड़ स्नोफॉल

सिक्किम के मौसम को पूरी तरह बदल दिया। 28 अक्टूबर से शुरू हुई तेज बारिश 30-31 अक्टूबर को ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी में तब्दील हो गई।

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भारत

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Vivek Kumar Singh

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Shaitan Prajapat

Oct 31, 2025

Winter Season

Winter Season: हिमालयी राज्य सिक्किम में साइक्लोन मोंथा के अप्रत्याशित प्रभाव से अचानक कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है। अक्टूबर के अंत में ही भारी बर्फबारी ने नॉर्थ और ईस्ट सिक्किम के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों लचुंग, लाचेन और त्सोमगो झील को मोटी सफेद चादर से ढक दिया। मौसम विभाग के अनुसार, यह इस सीजन की सबसे जल्दी और तीव्र बर्फबारी है, जो पूरे उत्तर भारत में लंबी सर्दियों का संकेत दे रही है। कई जगहों पर रिकॉर्ड तोड़ स्नोफॉल दर्ज किया गया, जिससे तापमान शून्य डिग्री से नीचे लुढ़क गया।

28 अक्टूबर से लगातार बारिश, फिर बर्फबारी

साइक्लोन मोंथा, जो हाल ही में बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ था, ने सिक्किम के मौसम को पूरी तरह बदल दिया। 28 अक्टूबर से शुरू हुई तेज बारिश 30-31 अक्टूबर को ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी में तब्दील हो गई। भारत-चीन सीमा पर स्थित नाथूला पास में शुक्रवार को मोटी बर्फ की परतें जम गईं, जबकि कुपुप और त्सोमगो झील क्षेत्र में सुबह से ही भारी स्नोफॉल जारी रहा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के डेटा से पता चलता है कि लचुंग में 24 घंटों में 20 सेंटीमीटर से अधिक बर्फ गिरी, जो अक्टूबर के लिए अभूतपूर्व है। लाचेन घाटी में भी समान मात्रा में स्नोफॉल हुआ, जिससे इलाके का नजारा स्वर्ग जैसा हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जलवायु परिवर्तन का असर हो सकता है, क्योंकि सामान्यतः इतनी भारी बर्फबारी नवंबर के मध्य से शुरू होती है।

रेड अलर्ट जारी: ऊंचे इलाकों में यात्रा पर रोक

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए रेड अलर्ट जारी कर दिया है। चेतावनी में कहा गया है कि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में फिसलन भरी सड़कें और तीव्र ठंड से हादसे की आशंका है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय वाहन चालकों से अपील की है कि लचुंग-लाचेन जैसे ऊपरी क्षेत्रों की यात्रा स्थगित रखें। बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) की विशेष टीमें सड़कों से बर्फ हटाने में लगी हुई हैं, ताकि आवश्यक आपूर्ति और सीमा सुरक्षा प्रभावित न हो। आपदा प्रबंधन दल भी हाई अलर्ट पर हैं। एक स्थानीय अधिकारी ने बताया, "यह बर्फबारी पर्यावरणीय रूप से सकारात्मक है, लेकिन मानवीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण। हम लोगों को गर्म कपड़ों और सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।" रात में तापमान और गिरने की संभावना से दैनिक जीवन ठप होने का खतरा है।

पर्यटन पर ब्रेक, लेकिन प्रकृति का नजारा लुभावना

सिक्किम का पर्यटन उद्योग, जो बर्फबारी पर निर्भर है, इस अचानक बदलाव से प्रभावित हुआ है। लचुंग और लाचेन जैसे स्पॉट्स पर सैलानी पहली बर्फ का मजा ले रहे हैं, लेकिन जोखिम के कारण प्रवेश सीमित कर दिया गया। होटल और गेस्टहाउस मालिकों का कहना है कि यह मौसम पर्यटकों को आकर्षित तो कर रहा है, लेकिन सुरक्षा पहले। एक पर्यटक ने शेयर किया, "बर्फीले पहाड़ों का नजारा अविस्मरणीय है, लेकिन ठंड असहनीय है।" दूसरी ओर, यह बर्फबारी जैव-विविधता को संरक्षित करने में मददगार साबित हो सकती है। पर्यावरण मंत्रालय ने हाल ही में सिक्किम की लैंपुखरी झील क्षेत्र में जैव-विविधता प्रोजेक्ट के लिए 8.3 लाख रुपये जारी किए हैं, जो स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाएगा।

हिमाचल-उत्तराखंड में भी स्नोफॉल की चेतावनी

सिक्किम की बर्फबारी उत्तर भारत के अन्य राज्यों को भी प्रभावित कर रही है। IMD ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में अगले कुछ दिनों में भारी ठंड और हल्की बर्फबारी की चेतावनी दी है। दिल्ली-एनसीआर में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री तक गिर सकता है, जबकि पहाड़ी इलाकों में कड़ाके की सर्दी पड़ेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह साइक्लोन का लंबा असर है, जो नवंबर तक जारी रह सकता है। लोगों को सलाह दी जाती है कि गर्म वस्त्र पहनें और स्वास्थ्य का ध्यान रखें।