‘शाश्वत यौगिक खेती’ पर ब्रह्माकुमारी संस्थान पर हुए आयोजन
नीमच. कृषक दिनों दिन तनाव और अभाव में जिन्दगी बिता रहा है। खेती दिनोंदिन घाटे का सौदा सिद्ध हो रही हैं। प्रकृति का भी सहयोग नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में ब्रह्माकुमारी संस्थान ने ‘शाश्वत यौगिक खेती’ का प्रोजेक्ट पिछले कुछ वर्षों से अनवरत चला रखा है।
यह बात ब्रह्माकुमारी संस्थान के ग्राम विकास प्रभाग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व कृषि विशेषज्ञ बीके राजू भाई ने कही। वे नीमच में आयोजित ‘राजयोगी किसान सम्मेलन’ को सम्बोधित कर रहे थे। बीके राजू भाई ने कहा कि इसके अंतर्गत हजारों गांवों में संस्थान के स्वयं सेवक रसायनिक खाद अथवा कीटनाशक का प्रयोग किए बिना खेती कर रहे हैं। खेत में गाय का गोबर, गौमूत्र तथा खेतों में ही पराली या खरपतवार से निर्मित हरी खाद, कम्पोस्ट खाद आदि के प्रयोग से जहरीली फसल की पैदावार से बचाया जा सकता है। यूरिया और कीटनाशकों का प्रयोग धरती को बंजर बना रहा है। अत: शाश्वत यौगिक खेती का प्रोजेक्ट अपना कर खेती को बहुत फायदेमंद बनाया जा सकता है। इसके लिए ब्रह्माकुमारी संस्थान के सैंकड़ों दल गांव-गांव में जाकर नि:शुल्क प्रशिक्षण शिविर चला रहे हैं। उन्होंने विश्व के अनेकानेक देशों तथा पांचों महाद्वीपों के लगातार अपने भ्रमण का सार सुनाते हुए बताया कि कृषक में भी कृषि कार्य के दौरान यदि सकारात्मक संकल्पों की एकाग्रता और राजयोग मेडिटेशन का प्रयोग किया जाए, तो बंजर भूमि भी लहलहा उठती है... आपने भारत के ही ऐसे अनेकानेक उदाहरण बताए जिसमें शाश्वत यौगिक खेती के प्रयोग से किसानों की आर्थिक उन्नति हुई है। ब्रह्माकुमारी पावनधाम के सद्भावना सभागार में आयोजित राजयोगी किसान सम्मेलन में नीमच व मंदसौर जिले के नियमित राजयोग के अभ्यासी किसान, महिला व पुरुष शामिल हुए।