एएसपी द्वारा जुटाए गए तथ्यों में जानकारी सामने आई है कि बघाना थाने पर पदस्थ आरक्षक जोनिश तंवर और कैलाश डाबी उस दौरान घटनास्थल पर थे जब यह हादसा हुआ। हालांकि अब तक भी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों आरक्षक जुआरियों को पकडऩे गए थे तब ही अंकित का भी उन्होने पीछा किया था या नहीं, लेकिन यह तथ्य पता चला है कि हादसा जब हुआ तब दोनों आरक्षक रेलवे ट्रैक के पास थे, हादसे के दौरान उन्हें मदद करना चाहिए थी जबकि वे वहां से रफुचक्कर हो गए। थाने पर या अधिकारियों को भी उन्होंने कोई सूचना नहीं दी। इसी आधार पर निलंबन की कार्रवाई की है।