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यह हकीकत है ग्राम उदय से भारत उदय की

- गांव की सड़क पर चलना पड़ता है संतुलन बनाकर- बारिश में बिगड़ रहे हालात, प्रसुता को लेना पड़ता है पलंग पर - जनप्रतिनिधियों ने नहीं सुना तो सीएम हेल्पलाइन में हुई शिकायत

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editorial neemach

Jul 30, 2017

nmh-badhaal gaanv

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नीमच/रतलाम।
ग्राम उदय से भारत उदय जैसे अभियान भी गावों की काया नहीं पलट पा रहे हैं। ऐसे अभियान जमीनी हकीकत से कोसों दूर दिखाई देते हैं। मनासा विधानसभा का गांधीसागर डूब से लगे गांव हैं नलवा और ढाणी। 60 बरसों में भी इन गावों की सड़कें नहीं सुधरी है। हालात इतने बुरे हैं कि नलवा के ग्रामीण जब सड़क से गुजरते हैं तो घुटनों तक कीचड़ में वे जब तक एक दो बार गिर नहीं जाते रास्ता पार ही नहीं कर सकते। जनप्रतिनिधियों से लगाकर प्रशासनिक अधिकारियों तक ग्रामीणों ने बार-बार गुहार लगा ली लेकिन स्थिति सुधर ही नहीं रही है।



प्रसुता को ले जाना पड़ता है पलंग पर-

नलवा गांव में घरों के बीच का रास्ता पूरी तरह कीचड़ से लबरेज है। गांव के पशुओं को जब खेतों पर ले जाया जाता है तो तस्वीर देखते बनती है। बकरियां भी कीचड़ को टालकर घरों के चबुतरों पर होकर निकलती है। लोगों को तो इस कीचड़ में पैदल चलने के लिए सर्कस के कलाकार की तरह संतुलन बनाना पड़ता है। ढाणी और नलवा को जोडऩे वाले मार्ग की दशा कभी नहीं सुधर सकी। बीच में एक नाले पर पुलिया है, जो बरसों से खराब है। पिछले वर्ष मनरेगा में इसे सुधारा गया था लेकिन कच्चा काम होने के कारण स्थिति फिर से बिगड़ गई। ग्रामीण बताते हैं कि ढाणी से किसी प्रसुता को अस्पताल ले जाने के लिए पलंग का सहारा लेना पड़ता है। इसी मार्ग पर आगे चलकर श्मसान घाट है किसी के निधन हो जाने पर लोग अर्थी को श्मसान घाट तक ले जाने में परेशान हो जाते हैं। बच्चे घुटनो तक कीचड़ में होकर जैसे तैसे जाते हैं।



परेशान होकर की सीएम हेल्पलाइन में शिकायत-

गांव की इस स्थिति से परेशान होकर युवा महेश गुर्जर ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने की बजाय सीधे सीएम हेल्पलाइन में ही शिकायत की है। महेश का कहना है कि शायद ग्रामीणों की उम्मीद पूरी हो सके। इतनी खराब हालत गांव के भीतर और बाहरी मार्ग की है। ग्रामीण परेशान हो रहे हैं लेकिन उनकी सुध कोई नहीं लेता है। विकास कार्यों के नाम पर भी यहां कुछ नहीं हो पा रहा है।



- गांव की सड़क के बारे में विधायक से लगाकर अधिकारियों तक से कई बार गुहार लगाई। पहले पुलिया का छोटामोटा काम हुआ था लेकिन स्थायी हल नहीं किया गया। इस बार भी सड़क स्वीकृति की बात कही गई लेकिन अब तक तो कुछ नहीं हुआ। दोनो गावों में बरसात के दिनों में बहुत ही परेशानी होती है। -
उदयराम धनगर
, सरपंच नलवा

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नलवा और ढाणी गांव डूब क्षेत्र से लगे हुए हैं। वहां पर यह समस्या हमेशा रहती है। दोनो गांव के बीच पुलिया के लिए आरईएस अधिकारियों से चर्चा कर हल निकालने को कहा है। सड़क का प्रस्ताव भी तैयार हो चुका है। पहुंच मार्ग बनवाने की कोशिश करेंगे। लेकिन बरसात में तो निर्माण कार्य उचित नहीं है। जल्द निराकरण का प्रयास करेंगे। -
वंदना मेहरा अटूट
, एसडीएम मनासा


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