
पानी की उपलब्धता की जानकारी को नक्शे में सहेजने के लिए राज्य की इरिगेशन एटलस तैयार की जाएगी। साथ ही भविष्य में इसका एक सॉफ्टवेयर भी तैयार होगा, जिससे सभी जिलों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सकेगी। इसके लिए सभी जिला मुख्यालय स्तर पर जलसंसाधन विभाग के स्तर पर भी काम शुरूहो चुका है। इस एटलस में पानी की उपलब्धता को दर्शाया जाएगा। इस एटलस का आधार जून 201६ से माना गया है। इन आंकड़ों में सभी स्तर के पानी के स्रोत और फोर वॉटर कनसेप्ट के तहत बनने वाले सभी स्रोत भी शामिल होंगे। मुख्यालय से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर स्टेट रिमोट सेनसिंग एप्लीकेशन सेंटर (एसआरएसएसी) जोधपुर की ओर से जियोटेग कर आंकड़े भेजे जाएंगे। इसके लिए आठ सदस्यों की टीम का गठन किया जा चुका है।
तैयार होगा स्टेट मैप और सॉफ्टवेयर
राज्य भर में बांध, वॉटर शेड, पंचायत राज के अंतर्गत बने स्रोतों में पानी की उपलब्धता को लेकर काम शुरूहो चुका है। इसके लिए जिलास्तर से आंकड़े जुटाने का काम शुरू किया गया है। इसके लिए सभी वॉटर बॉडिज की हार्इ रिजुलिशन जीपीएस कैमरों से फोटो ली जा रही है। जिसके बाद इन आंकड़ों को एसआरएसएसी जोधपुर को भेजा जाएगा। जिसके आधार पर राज्य का मैप तैयार किया जाएगा। जिसके बाद उसका एक सॉफ्टवेयर भी तैयार किया जाएगा। जिसके आधार पर राज्य के किसी भी जिले में पानी की उपलब्धता को लेकर जानकारी सॉफ्टवेयर पर एक क्लिक से ही उपलब्ध हो जाएगी।
हाई रिजुलेशन कैमरों का उपयोग
जालोर जिले में यह काम प्रारंभिक चरण में है, जबकि पड़ौसी जिले सिरोही में इसके लिए काम शुरूहो चुका है। वॉटर प्वाइंट की स्थिति का आंकलन के लिए ड्रोन कैमरे का उपयोग लिया जा रहा है। इन वॉटर प्वाइंट की फोटो का एकत्र कर राज्य स्तर पर टीम को भेजा जाएगा। जिसके आधार पर एटलस तैयार की जाएगी।
मानसून पूर्व और मानसून के बाद की स्थिति आधार
एडिशनल चीफ इंजीनियर जोधपुर सुरेश माथुर ने बताया कि स्टेट मैप का काम शुरू हो चुका है। शुरुआत का आधार जून 2016 को माना गया है। जिसमें जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता की स्थिति को इंकित किया जाएगा। वहीं बारिश के बाद इन स्रोतों में पानी की उपलब्धता कितनी बढ़ती है। इसके लिए बारिश के बाद भी इन जलस्रोतों की स्थिति को लेकर स्थिति का आंकलन किया जाएगा।
एक क्लिक में जानकारी
हालांकि राज्य में पानी की उपलब्धता की जानकारी हासिल करना और उसका नक्शा तैयार करने का प्रोसेस लंबा है, लेकिन इसके लिए पहल शुरूहो चुकी है। काम पूरा होने के बाद इसके आंकड़ों को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। साथ ही इसका सॉफ़्टवेयर तैयार होने के साथ देश विदेश में किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति राज्य के किसी भी हिस्से में पानी की उपलब्धता की जानकारी हासिल कर सकेगा।
राजस्थान के सभी जलस्रोतों की स्थिति की जानकारी के लिए इरिगेशन एटलस तैयार की जानी है। इसके लिए विभागीय स्तर पर काम शुरूहो चुका है। सभी जिलों से आंकड़ों का संधारण किया जाएगा।जिसके आधार पर एसआरएसएसी की ओर से एटलस तैयार की जाएगी।
- विनोद शाह, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग, जयपुर
Published on:
13 Sept 2016 11:28 am

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