
आम बजट में लोग हेल्थ इंश्योरेंस में छूट सहित सरकार से चाहते हैं ये 7 बड़ी राहतें
नई दिल्ली. आर्थिक मंदी की आशंका से नौकरियों में हुई बड़ी छंटनी से कई घरों का बजट गड़बड़ हो गया है। पिछले साल महंगाई दर में अचानक हुई वृद्धि ने लोगों के बजट को हिला कर रख दिया। ईंधन एवं सर्विसेज की ऊंची कीमत से उनकी क्रय शक्ति भी घट ही है। ऐसे में लोग वित्त वर्ष 2023-24 के लिए पेश होने वाले आगामी आम बजट से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इनकम टैक्स छूट की सीमा को 2.5 लाख रुपए से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर सकती है। इसके अलावा बजट से लोगों की ये उम्मीदे हैं...
निवेश पर टैक्स छूट बढ़े
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी की लिमिट में पिछले कई साल में कोई इजाफा नहीं हुआ है। एक्सपट्र्स के मुताबिक सेक्शन 80सी की लिमिट बढ़ाए जाने की जरूरत है। इसके तहत अभी सालाना 1.50 लाख रुपए तक के निवेश पर टैक्स छूट मिलती है, जिसे बढ़ाकर 3 लाख रुपए करने की मांग फिक्की सहित कई संगठनों ने की है।
होम लोन पर ब्याज दर में छूट:
अभी सेक्शन 24 के तहत होम लोन पर 2 लाख रुपए की टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा सेक्शन 80ईई के तहत 50,000 रुपए की अतिरिक्त छूट मिलती है।
ब्याज दरों में इजाफा के बाद रियल एस्टेट इंडस्ट्री सरकार से होम लोन पर इंटरेस्ट में मिलनी वाली छूट की मौजूदा सीमा को बढ़ाने की मांग कर रही है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन:
अभी टैक्सपेयर्स को 50,000 रुपए का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। पिछले दो साल में तेल की ऊंची कीमतों और दवाइयों की बढ़ी हुई लागत की वजह से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की मांग हो रही है।
हेल्थ इंश्योरेंस में छूट
सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने पर 25,000 रुपए तक की टैक्स छूट मिलती है, लेकिन इंश्योरेंस पर कोविड जीएसटी लागू किए जाने की वजह से प्रीमियम बढ़ गए हैं। इस वजह सेक्शन 80डी के तहत लिमिट को 50,000 तक बढ़ाने से लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस कराने को लेकर प्रोत्साहन मिलेगा।
नया टैक्स रिजीम आकर्षक हो
केंद्रीय बजट 2020 में सरकार ने बिना किसी छूट वाले नए टैक्स रिजीम को पेश किया था। इसके जरिए सरकार ने टैक्स फाइलिंग प्रोसेस को सरल बनाने की कोशिश की थी। कई लोगों ने टैक्स रिजीम को अपनाया भी है लेकिन एक्सपट्र्स का मानना है कि नए टैक्स रिजीम को और आकर्षक बनाए जाने की जरूरत है। इसमें भी निवेश पर टैक्स में छूट का प्रावधान होना चाहिए।
ये मांगे भी
15 लाख रुपए से ज्यादा इनकम वालों को अभी 30% टैक्स देना पड़ता है, इस सीमा को बढ़ाकर 20 लाख रुपए करने की मांग
42.77 % हो जाती है टैक्स की दर सेस और सरचार्ज जोड़ सुपर रिच लोगों के लिए
35 % पर लाने की डिमांड 42 % अधिकतम टैक्स रेट को कम करके
ऐसा है अभी इनकम टैक्स स्लैब
वार्षिक आय पुरानी व्यवस्था नई व्यवस्था
2.5 लाख तक 0% 0%
2.5-05 लाख 5% 5%
05 -7.5 लाख 20% 10%
7.5-10 लाख 20% 15%
10-12.5 लाख 30% 20%
12.5-15 लाख 30% 25%
15 लाख से अधिक 30% 30%
Published on:
04 Jan 2023 05:59 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
