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तेज फैसलों के जरिए नई राजनीतिक लय तलाश रही कांग्रेस

कांग्रेस अपने फैसले लेने में देरी और संगठनात्मक नियुक्तियों को टालने की छवि बदलने की कोशिश में जुटी है। पार्टी नेतृत्व ने हाल के महीनों में यह संदेश देने का प्रयास किया है कि राजनीतिक और संगठनात्मक निर्णयों को अब लंबित रखने के बजाय समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा

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Rahul Priyanka Kharge

नई दिल्ली। कांग्रेस अपने फैसले लेने में देरी और संगठनात्मक नियुक्तियों को टालने की छवि बदलने की कोशिश में जुटी है। पार्टी नेतृत्व ने हाल के महीनों में यह संदेश देने का प्रयास किया है कि राजनीतिक और संगठनात्मक निर्णयों को अब लंबित रखने के बजाय समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन और संगठन से जुड़े फैसलों को जिस तेजी से अमल में लाया जाए, उसे कांग्रेस के भीतर नए कार्यशैली मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इसी रणनीति के तहत कांग्रेस अब अपनी राजनीतिक लय और संगठनात्मक गति दोनों को साधने की कोशिश में जुटी है।

दरअसल, पार्टी अब 2027 और 28 में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि भाजपा से मुकाबला करने के लिए सख्त फैसले सही समय पर करने ही होंगे। कई राज्यों में संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में देरी का नुकसान चुनावी स्तर पर उठाना पड़ा है। यही वजह है कि केरल में मुख्यमंत्री पद के लिए राहुल गांधी के नजदीकी संगठन महासचिव के.सी.वेणुगोपाल की जगह वीडी सतीशन को चुना गया। वहीं पार्टी ने कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलते ही संगठन में भी फेरबदल का फैसले भी कर दिए।

त्रिकोणीय नेतृत्व मॉडल

कांग्रेस के भीतर फिलहाल एक तरह से त्रिकोणीय नेतृत्व मॉडल काम करता दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी पार्टी के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरे की भूमिका में हैं, प्रियंका गांधी पर्दे के पीछे राजनीतिक फीडबैक और नेताओं से संवाद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे संगठन और प्रशासनिक फैसलों को अंतिम रूप देने वाले केंद्र बिंदु बने हुए हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि इस समन्वय के जरिए कांग्रेस फैसले लेने में देरी की अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है।

फ्रंट पर राहुल गांधी की भूमिका

अक्सर राहुल पर पार्टी के मुश्किल फैसलों के समय बाहर जाने या टालमटोल करने के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ महीनों में राहुल ने अपनी सक्रियता को खासा बढ़ाया है। जहां उन्होंने केरल, कर्नाटक के साथ कुछ राज्यों के संगठन में बदलाव का फैसला जल्दी-जल्दी करवाया है, वहीं सीबीएसई, नीट पेपर लीक मामले में स्टूडेंट्स, महंगाई के मुद्दे पर ऑटो चालकों से मिलकर आमजन की समस्याओं को उठाने की कोशिश की है। इसके साथ ही देश में अलग-अलग राज्यों में पार्टी कार्यक्रमों में शामिल होकर कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनमें जोश भरने का काम किया है।

पर्दे के पीछे प्रियंका गांधी

पार्टी सूत्रों का कहना है कि महासचिव व सांसद प्रियंका गांधी पर्दे के पीछे रहकर पार्टी के फैसलों में अहम भूमिका निभा रही है। केरल और कर्नाटक में मुख्यमंत्री चुनने में उनकी भूमिका की खासी चर्चा है। हालांकि वे सार्वजनिक तौर पर हर मुद्दे पर सामने नहीं आतीं, लेकिन राज्यों से आने वाली राजनीतिक रिपोर्ट, नेताओं के बीच समन्वय और संगठनात्मक समीकरणों पर उनकी नजर बनी हुई है। कई प्रदेश नेताओं के साथ उनका सीधा संवाद भी पार्टी नेतृत्व के लिए फीडबैक का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

आगे चुनावी राज्यों पर फोकस

पार्टी अब अगले दो साल में चुनाव में जाने वाले राज्य पंजाब, उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना पर फोकस करने जा रही है। इसको देखते हुए राष्ट्रीय कार्यकारिणी व प्रदेश स्तर पर बदलाव पर मंथन चल रहा है।

60 सचिवों की रिपोर्ट कार्ड जांच, आधों पर गिर सकती है गाज

कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी कर रही है। पार्टी नेतृत्व ने हाल ही में एआईसीसी के करीब 60 सचिवों के कामकाज की समीक्षा की है। इसके साथ ही राज्यों में रिक्त पड़े प्रदेश प्रभारी पदों को भरने और कुछ राज्यों में प्रभारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव पर भी मंथन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सचिवों से राज्यों में उनकी सक्रियता, संगठनात्मक कार्यक्रमों में भागीदारी और राजनीतिक फीडबैक को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। प्रदेश प्रभारियों और राज्य इकाइयों से भी उनके प्रदर्शन पर राय ली गई है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि कई नए चेहरों को मौका देने और चुनावी राज्यों में संगठन को अधिक सक्रिय बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है।

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