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Delhi: दिल्ली महिला आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को भेजा नोटिस, दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच में देरी को लेकर पूछा कारण

दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच में देरी को लेकर स्वास्थ्य विभाग को नोटिस - दिल्ली महिला आयोग ने गुरुवार को जारी किया नोटिस - आयोग ने देरी को लेकर स्वास्थ्य विभाग से पूछा कारण पत्रिका ब्यूरो दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच में लंबी देरी को लेकर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग को गुरुवार को नोटिस जारी किया। आयोग की टीम ने कई अस्पतालों में पाया कि वहां पर 12 से 15 घंटे तक मेडिकल जांच में देरी हो रहे है, इसे लेकर विभाग से कारण पूछा गया।

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Delhi: दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच में देरी को लेकर स्वास्थ्य विभाग को दिल्ली महिला आयोग ने भेजा नोटिस, देरी पर पूछा कारण

Delhi: दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच में देरी को लेकर स्वास्थ्य विभाग को दिल्ली महिला आयोग ने भेजा नोटिस, देरी पर पूछा कारण

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग को दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच में लंबी देरी को लेकर गुरुवार को नोटिस जारी किया। आयोग की टीम की सदस्य यौन हिंसा की पीड़िता महिलाओं और बच्चियों को आयोग की रेप क्राइसिस सेल (आरसीसी) और क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर ( सीआइसी) कार्यक्रमों के जरिए सहायता करता है। इस कार्यक्रम के तहत ऐसी पीड़िताओं को मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता आयोग द्वारा प्रदान की जाती है। आयोग ने इस दौरान यह पाया कि अस्पतालों में पीड़िताओं की मेडिकल जांच में अनुचित देरी होती है।

आयोग ने दावा किया है कि उन्होंने पाया कि दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच करने में लगभग 15 घंटे, लोक नायक अस्पताल में 12 घंटे और सफदरजंग अस्पताल में 8 घंटे 28 मिनट, राम मनोहर लोहिया अस्पताल में 8 घंटे 4 मिनट, जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में 7 घंटे 20 मिनट, दीप चंद बंधू अस्पताल में 7 घंटे 2 मिनट, बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर अस्पताल में 5 घंटे 37 मिनट, हिंदू राव अस्पताल में 5 घंटे 28 मिनट लगे। राजधानी के अस्पतालों में एक दुष्कर्म पीड़िता को उसकी मेडिकल जांच के लिए औसतन घंटों इंतजार करना पड़ता है। आयोग ने स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर 23 अस्पतालों में इंटरनल एमएलसी और पांच अस्पताल में फॉर्मल एमएलसी में मेडिकल जांच के मामलों में देरी को लेकर नाम बताए हैं।

देरी को लेकर स्वास्थ्य विभाग से पूछा कारण

आयोग के मुताबिक पीड़िता के साथ किए गए अपराध के कारण वह पहले से ही मानसिक परेशानी से गुजर रही होती है। मेडिकल जांच करने में अनुचित देरी के कारण उसका और अधिक उत्पीड़न होता है। आयोग ने मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर इस देरी का कारण पूछा है। आयोग ने यह आकलन करने के लिए जानकारी मांगी है कि क्या दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच के लिए बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन को विशेष रूप से उपलब्ध कराया गया है या फिर इस काम के लिए अस्पताल के अन्य विभागों से संसाधन लिए जाते हैं।

समय सीमा पर जांच न होने पर कार्रवाई की मांगी जानकारी

आयोग ने दुष्कर्म पीड़िताओं की मेडिकल जांच के लिए प्राथमिकता देने के लिए अस्पतालों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया, मेडिकल जांच के लिए तय मानक समय सीमा और जरूरी समय सीमा के अंदर मेडिकल जांच नहीं होने पर अधिकारियों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है। आयोग ने अपने नोटिस में कहा है कि अगर स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस संबंध में अभी तक किसी मानक प्रक्रिया का मसौदा तैयार नहीं किया गया है, तो इसे तत्काल तैयार किया जाना चाहिए।

मेडिकल जांच के लिए 15 घंटे इंतजार करने को मजबूर पीड़िता

स्वाति मालीवाल ने कहा यह बहुत ही दुखद है कि देश की राजधानी में एक पीड़िता को कभी-कभी उसकी मेडिकल जांच के लिए 15 घंटे इंतजार करने के लिए मजबूर किया जाता है, जो कि कानून के तहत अनिवार्य और जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस तरह की लंबी देरी पीड़िता के लिए बहुत ज्यादा उत्पीड़न और परेशानी का कारण बनती है और उसके दुख को कई गुना बढ़ा देती है। हमने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी किया है और यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे कि दुष्कर्म पीड़िताओं के प्रति इस उदासीन रवैये को तत्काल ठीक किया जाए। इससे दिल्ली पुलिस को मामले की जांच पर ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि उन्हें पीड़ितों के साथ अस्पतालों में लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

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