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जीवनशैली और खान-पान में बदलाव से 50 फीसदी भारतीयों में शुगर की मात्रा पाई गई असामान्य

नई दिल्ली. जीवनशैली और खान-पान में बदलाव से भारतीयों में मधुमेह का खतरा तेजी से फैल रहा है। निदान सेवा प्रदाता ‘थायरोकेयर’ की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में 19.6 लाख वयस्क भारतीयों के स्वास्थ्य चेक-अप डेटा के अध्ययन से पता चला कि 49.43 फीसदी लोगों में शुगर की मात्रा असामान्य थी। इनमें 27.18 फीसदी के […]

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नई दिल्ली. जीवनशैली और खान-पान में बदलाव से भारतीयों में मधुमेह का खतरा तेजी से फैल रहा है। निदान सेवा प्रदाता ‘थायरोकेयर’ की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में 19.6 लाख वयस्क भारतीयों के स्वास्थ्य चेक-अप डेटा के अध्ययन से पता चला कि 49.43 फीसदी लोगों में शुगर की मात्रा असामान्य थी। इनमें 27.18 फीसदी के डायबिटिक और 22.25 फीसदी के प्री-डायबिटिक होने की पहचान हुई।

लैंसेट जर्नल में हाल ही छपे शोध की तरह इस रिपोर्ट में भी कहा गया कि दुनिया में करीब 83 करोड़ मधुमेह पीडि़तों में एक चौथाई से ज्यादा भारतीय हैं। यानी देश में 21.2 करोड़ वयस्क मधुमेह के मरीज हैं। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के 2023 के अध्ययन में बताया गया था कि भारत में 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज और 13.6 करोड़ प्री-डायबिटीज की स्टेज में हैं।

एक कारण यह भी

नए शोध के मुताबिक भारत में मधुमेह के मरीज बढऩे का एक कारण केक, चिप्स, कुकीज, क्रैकर्स, तले हुए खाने और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का बढ़ता चलन है। इनके लगातार सेवन से पैन्क्रियाज में इन्सुलिन की कमी हो जाती है। इसके कारण खून में ग्लूकोज की मात्रा बढऩे लगती है।

टाइप-2 के मरीज ज्यादा

भारत में टाइप-2 डायबिटीज के मामले ज्यादा हैं। यह आमतौर पर मध्यम उम्र या वृद्ध लोगों में होती है। टाइप-1 डायबिटीज आमतौर पर कम उम्र में होती है। इसका ठीक होना ज्यादा मुश्किल होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर निदान और उपचार से डायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है।