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महात्मा गांधी की हत्या करने वाले आज देश की सत्ता में हैं काबिज: स्वरा भास्कर

स्वरा भास्कर ने कहा कि इस देश में महात्मा गांधी जैसे महान इंसान की हत्या हुई है, उस वक्त भी कुछ लोग ऐसे ही लोग थे जो उनकी हत्या का जश्न मना रहे थे।

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महात्मा गांधी की हत्या करने वाले आज देश की सत्ता में है काबिज: स्वरा भास्कर

महात्मा गांधी की हत्या करने वाले आज देश की सत्ता में है काबिज: स्वरा भास्कर

नई दिल्ली। अपने अभिनय और कला के कारण करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाने वाली बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री स्वरा भास्कर अपने बेबाक बयानों की वजह से अक्सर चर्चा में बनी रहती हैं। राजधानी दिल्ली में शनिवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान मौजूदा सरकार पर दिए एक बयान के बाद फिर से वह सुर्खियों में आ गई। स्वारा भास्कर ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। बता दें कि एक सवाल के जवाब में स्वरा भास्कर ने कहा कि इस देश में महात्मा गांधी जैसे महान इंसान की हत्या हुई है, उस वक्त भी कुछ लोग ऐसे ही लोग थे जो उनकी हत्या का जश्न मना रहे थे। उन्होंने कहा कि आज वही लोग देश की सत्ता में काबिज हैं। क्या उन सबको जेल में डाल देना चाहिए? नहीं न! सचमुच नहीं! बता दें कि बीते दिनों कुछ बुद्धिजीवियों को जांच ऐजेसियों की रिपोर्ट के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसके बाद देशभर में इनकी गिरफ्तारी को लेकर सवाल खड़े हो गए। सभी ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझ कर इनलोगों को गिरफ्तार किया है। जांच ऐजेंसियों की रिपोर्ट की मानें तो ये सभी लोग पीएम मोदी की हत्या की साजिश रचने वाले समूह के हिस्सा थे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उनलोगों की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें घर पर ही नजरबंद रखने का आदेश दिया है। इसी संबंध में एक सवाल का जवाब देते हुए स्वरा भास्कर के मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

इससे पहले भी दे चुकी हैं ऐसी बयान

आपको बता दें कि यह कोई पहला अवसर नहीं है जब स्वरा भास्कर अपने बयान के लिए सुर्खियों में रही हैं। इससे पहले जनवरी में ही फिल्म पद्मावत को लेकर एक ट्वीट की थी जिसके बाद सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हुईं थी। स्वरा ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि "फिल्म देखने के बाद मैं खुद को योनि मात्र महसूस कर रही हूं।" उन्होंने आगे लिखा कि "आपकी महान रचना के अंत में मुझे यही लगा। मुझे लगा कि मैं एक योनि हूं। मुझे लगा कि मैं योनि तक सीमित होकर रह गई हूं। मुझे ऐसा लगा कि महिलाओं और महिला आंदोलनों को वर्षो बाद जो सभी छोटी उपलब्धियां, जैसे मतदान का अधिकार, संपत्ति का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, 'समान काम समान वेतन' का अधिकार, मातृत्व अवकाश, विशाखा आदेश का मामला, बच्चा गोद लेने का अधिकार मिले। सभी तर्कहीन थे। क्योंकि हम मूल प्रश्न पर लौट आए।"

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