नई दिल्ली. गर्भावस्था में भारी भरकम इलाज खर्च से परेशान महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। अब देशभर में हर गर्भवती महिला के उपचार का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जाएगा। डॉक्टर इस मेडिकल रिकॉर्ड को देख हर महीने की नौ तारीख को जांच के लिए खुद घर-घर जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लॉन्च मोबाइल एप व पोर्टल से ऐसा संभव होगा। इससे गंभीर बीमारियों का पता लगाकर कई महिलाओं की जानें बचाई जा सकेंगी। योजना की शुरुआत इस साल जून में की गई थी, लेकिन अब इसे डिजिटलाइज्ड किया गया है।
हरियाणा में प्रयोग रहा सफल
हरियाणा के करनाल में प्रयोग सफल होता दिख रहा है। करनाल के डिप्टी सीएमओ सतबीर सिंह के अनुसार, जिले की गर्भवती महिलाओं का निशुल्क इलाज किया जा रहा है। हर महीने डॉक्टरों के जाने से ऐसे हाई रिस्क मामले पकड़ में आए हैं, जो अब तक बहुत कम संख्या में सामने आते थे। अहम बात यह है कि करनाल जिले में मत्युदर में कमी आई है।
ऐसे मिलेगा फायदा
यूनिसेफ इस कार्यक्रम में केंद्र सरकार का सहयोग कर रहा है। एप व पोर्टल पर रिकॉर्ड देख महिला को जरूरत पडऩे पर इलाके के नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराए जाने का प्रावधान है। सरकारी अस्पतालों ने काउंसलर भी नियुक्त किए हैं, जो आशा वर्कर्स की मदद से महिलाओं की काउंसिलिंग करते हैं। हर महीने की नौ तारीख को गर्भवती महिलाओं को निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल उपलब्ध कराया जाता है।
एप से ऐसे मिलेगी मदद
केन्द्र सरकार ने http://pmsma.nhp.gov.in/ पोर्टल और एप लॉन्च किया है। इस पोर्टल पर एप डाउनलोड करने का लिंक दिया गया है। यहां गर्भवती महिला का रिकॉर्ड दर्ज करेंगे, जिसे देखकर डॉक्टर खुद घर-घर पहुंचेंगे।