
नासा का मून मिशन लॉन्च, तीसरे प्रयास में चांद की कक्षा में भेजा शक्तिशाली रॉकेट
वाशिंगटन. अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने करीब 50 साल बाद चंद्रमा के लिए अपना मिशन आर्टेमिस-1 लॉन्च किया है। नासा के सबसे शक्तिशाली रॉकेट (एसएलएस) ने बुधवार को तीसरे प्रयास में फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से अंतरिक्ष यान ऑरियन को लेकर उड़ान भरी। इससे पहले 29 अगस्त और 3 सितंबर को भी लॉन्चिंग की कोशिशें की गईं थीं, लेकिन तकनीकी खराबी और मौसम खराब होने से इन्हें टालना पड़ा था।
इस मिशन के लिए नासा ने अभी तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट बनाया है। यह करीब 322 फीट (98 मीटर) लंबा है। यात्रा के दौरान ऑरियन चांद की सतह से करीब 60 मील (96.5 किलोमीटर) की दूरी से गुजरेगा और चंद्रमा की कक्षा में 10 उपग्रह स्थापित करेगा। ये उपग्रह चांद की सतह के बारे में जानकारियां देंगे। ऑरियन यात्रा में कुल 20 लाख 92 हजार 147 किलोमीटर का सफर तय करेगा और 25 दिन अंतरिक्ष में बिताने के बाद 11 दिसंबर को प्रशांत महासागर में आ गिरेगा। गौरतलब है कि नासा ने करीब 50 साल पहले 1972 में चांद पर अपना आखिरी मिशन अपोलो भेजा था।
2025 में तीसरा मिशन यात्रियों को लेकर जाएगा
आर्टेमिस-1 एक टेस्ट फ्लाइट है। इसमें अंतरिक्ष यात्री नहीं होंगे। इसके बाद आर्टेमिस-2 से कुछ यात्री चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा के बाद लौट आएंगे। नासा का मुख्य मिशन 2025 में आर्टेमिस-3 होगा। इसमें अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर उतारा जाएगा।
आर्टेमिस-1 के उपग्रहों से मिलेगी जानकारी
1. चांद पर माइक्रोग्रेविटी और विकिरण वातावरण सूक्ष्मजीवों के विकास को किस तरह से प्रभावित करते हैं।
2. चांद पर बर्फ के भंडार की खोज करेगा। इसका उपयोग भविष्य में चांद पर जाने वाले यात्री कर पाएंगे।
Updated on:
17 Nov 2022 07:46 am
Published on:
17 Nov 2022 12:48 am
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