
कोलंबो। श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे के खिलाफ संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। यह चर्चा श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे नेतृत्व में एक समूह की ओर से उठाए गए प्रस्ताव पर हो रही है। बुधवार को इस चर्चा के बाद सदन में वोटिंग कराई जाएगी। गौरतलब है कि विक्रमसिंघे को इस प्रस्ताव को हराने के लिए 225 में 113 मतों की जरूरत है। हालांकि, इस चर्चा से सरकार पर भले ही इसका कोई प्रभाव न पड़े, लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि देश के अंदर राजनैतिक अस्थिरता और तनाव का माहौल पैदा हो सकता है।
विक्रमसिंघे पर कई आरोप
आपको बता दें कि रानिल विक्रमसिंघे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के पीछे कई कारण हैं। दरअसल, प्रधानमंत्री पर कई आरोप लगे हैं। विक्रमसिंघे पर आरोप है कि वह देश की धराशाही होती अर्थव्यवस्था को बचा नहीं पाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले साल देश की अर्थव्यवस्था में करीब 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई थी। इसके कारण श्रीलंका के मुद्रा का अवमूल्यन हुआ और देश में मंदी तक की नौबत आ गई थी। इसके अलावा कई ऐसे मुद्दे सामने आए, जिनको देखते हुए उन्ही के गठबंधन वाली पार्टी ने ही उनका विरोध करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं उन पर यह भी आरोप है कि एक विदेशी बैंक में उन्होंने गवर्नर की नियुक्ति की थी और अपने दामाद को लाभ पहुंचाने के लिए उन्होंने उनकी मदद से कुछ डेटा भी लिंक करवाया था।
राष्ट्रपति ने विक्रमसिंघे से मांगा था इस्तीफा
गौरतलब है कि 2015 में राजपक्षे को हराकर सिरीसेन श्रीलंका के राष्ट्रपति बने। सिरीसेन की पार्टी 'श्रीलंका फ्रीडम' विक्रमसिंघे के साथ गठबंधन में है। फरवरी में स्थानीय निकाय चुनाव में राजपक्षे की पार्टी से मिली हार के बाद सिरीसेन ने विक्रमसिंघे से इस्तीफा मांगा था। लेकिन, उन्होंने सिरीसेन के प्रस्वात को ठुकरा दिया था। वहीं, विक्रमसिंघे की यूनाइटिड नेशनल पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने त्यागपत्र देने से इनकार कर दिया है। राज्य मंत्री हर्ष डी सिल्वा ने आरोप लगाया है कि सिरीसेना चाहते हैं कि विक्रमसिंघे पद से हट जाएं ताकि वह अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा सकें।
Updated on:
04 Apr 2018 03:12 pm
Published on:
04 Apr 2018 02:57 pm
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