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TTVR : ट्रांसकैथेटर ट्राइकसपिड वाल्व रिप्लेसमेंट, हाई रिस्क दर्दी को मिला नवजीवन

मेडिकल सायन्स और ह्युमानिटी के अद्भुत संगम की मिसाल पेश करते हुए, मैरिंगो CIMS हॉस्पिटल ने गुजरात में पहली बार ट्रांसकैथेटर ट्राइकस्पिड वाल्व रिप्लेसमेंट प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा इतिहास रच दिया है।

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— मैरिंगो CIMS हॉस्पिटल ने गुजरात में पहली बार दिया सर्जरी को अंजाम

नई दिल्ली। मेडिकल सायन्स और ह्युमानिटी के अद्भुत संगम की मिसाल पेश करते हुए, मैरिंगो CIMS हॉस्पिटल ने गुजरात में पहली बार ट्रांसकैथेटर ट्राइकस्पिड वाल्व रिप्लेसमेंट प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा इतिहास रच दिया है। यह एडवान्स्ड और लाइफसेविंग प्रोसेस 61 वर्षीय महिला पेशन्ट पर की गई, जिनके जीवन में पहले ही तीन बड़ी हार्ट सर्जरी हो चुकी थीं और जिनके लिए ट्रेडिशनल ओपन-हार्ट सर्जरी अब संभव नहीं रह गई थी।

पेशेंट की ट्रिटमेन्ट अत्यंत चुनौतीपूर्ण और प्रेरणादायक रही है। वर्ष 1984 में उनकी पहली हार्ट वाल्व सर्जरी हुई। इसके बाद 1996 में एक जटिल री-डू सर्जरी की गई और फिर 2016 में ट्राइकसपिड वाल्व रिप्लेसमेंट किया गया। समय के साथ बदला हुआ वाल्व कमजोर हो गया और उसमें गंभीर लीकेज शुरू हो गया। ट्राइकसपिड वाल्व हृदय के दाहिने हिस्से का एक अत्यंत महत्वपूर्ण वाल्व होता है, जिसके माध्यम से रक्त हृदय में प्रवेश करता है और इसे उपचार की दृष्टि से सबसे जटिल वाल्वों में गिना जाता है।
वाल्व फेल होने के कारण मरीज को पैरों और चेहरे में सूजन, लीवर में कंजेशन, सांस फूलना और अत्यधिक थकावट जैसी गंभीर समस्याएँ होने लगीं, जिससे रोजमर्रा की साधारण गतिविधियाँ भी कठिन हो गई थीं।

चिकित्सकों ने परिवार को स्पष्ट रूप से बताया कि एक और ओपन-हार्ट सर्जरी अत्यंत जोखिमपूर्ण और जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में, जब कोई सुरक्षित सर्जिकल विकल्प शेष नहीं था, तब अस्पताल की मल्टीडिसिप्लिनरी हार्ट टीम ने एक एडवान्स्ड और न्यूनतम इनवेसिव उपचार पद्धति, ट्रांसकैथेटर ट्राइकसपिड वाल्व रिप्लेसमेंट को अपनाने का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में छाती खोले बिना क्षतिग्रस्त वाल्व को बदला जाता है, जिससे मरीज को नई आशा मिली।

यह अत्यंत उच्च जोखिम वाली TTVR प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई। प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही, स्वास्थ्य में निरंतर सुधार हुआ और मात्र तीन दिनों के भीतर उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया, जिससे परिवार को अपार राहत और उम्मीद मिली। इस अवसर पर ऑपरेटिंग कार्डियोलॉजिस्ट व गुजरात के वरिष्ठ हार्ट स्पेशियालिस्ट डॉ. मिलन छाग ने कहा, मैं पिछले 31 वर्षों से इस पेशेंट का इलाज कर रहा हूं। उनके अनुशासन, विश्वास और नियमित फॉलो-अप के कारण वे तीन ओपन-हार्ट सर्जरी के बावजूद लंबे समय तक स्वस्थ रहीं। जब ट्राइकसपिड वाल्व फेल होने के कारण उनकी जीवन गुणवत्ता अत्यंत खराब हो गई और बार-बार अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, तब यह TTVR प्रक्रिया उनके लिए जीवनदायिनी साबित हुई।

मारेंगो CIMS हॉस्पिटल के डायरेक्टर - कार्डियो थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी एवं हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जन, डॉ. धीरेन शाह ने कहा, इस मेडिकल माईलस्टोन को और भी अधिक ह्युमेनिटेरियन और अर्थपूर्ण बनाता है पेशन्ट के परिवार का वह योगदान, जिसके अंतर्गत उनके एक निकट संबंधी ने पूर्व में कैडैवर अंगदान का निर्णय लेकर पांच लोगों की जान बचाई थी। इस असाधारण सामाजिक योगदान को ध्यान में रखते हुए, मेडिकल टीम ने केवल चिकित्सकीय नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के तहत भी आगे बढ़ने का निर्णय लिया। यही कारण है कि यह हाई-रिस्क प्रोसेस वास्तविक लागत के केवल 50 प्रतिशत पर की गई और इस दुर्लभ करुणामय पहल में विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी प्रोफेशनल फीस भी नहीं ली।

ऐतिहासिक सर्जरी से भारत विश्व मानचित्र पर उभरा

यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल पश्चिम भारत को एडवान्स हार्ट केर के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि नैतिकता, संवेदनशीलता और कृतज्ञता पर आधारित चिकित्सा सेवा जीवन को गहराई से प्रभावित कर सकती है। मरीज की रिकवरी और हृदय की कार्यप्रणाली पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। गुजरात में पहली बार की गई यह TTVR प्रक्रिया दृढ़ संकल्प, मानवीय संवेदना और करुणामय चिकित्सा सेवा की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक बनकर सामने आई है।