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Woman Power: जानिए सियाचीन में तैनात पहली महिला अफसर की कहानी

जिस सियाचीन ग्लेशियर का नाम सामने आते ही कम्पकम्पी छूटने लगती है, वहां के दुर्गम बर्फीले इलाके में भी अब महिला शक्ति अपना जलवा दिखाएगी। भारतीय सेना की महिला अधिकारी शिवा चौहान 16 हजार से अधिक ऊंचाई पर स्थित सियाचीन की कुमार चौकी पर तैनात होने वाली पहली महिला बन गई है। वे -30 डिग्री तक चले जाने वाले तापमान के बीच तीन महीने वहां ऑपरेशनल गतिविधियों में शामिल होंगी।

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Woman Power: जानिए सियाचीन में तैनात पहली महिला अफसर की कहानी

सियाचीन ग्लेशियर पर चढ़ाई करती कैप्टन शिवा चौहान

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ऊंचे सामरिक क्षेत्र सियाचीन ग्लेशियर में तैनात होने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी कैप्टन शिवा चौहान ने सेना ही नहीं, अपने जीवन में भी कई मुश्किल लड़ाइयां लड़ी है।

राजस्थान के उदयपुर की मूल निवासी शिवा अपनी लगभग 11 साल की उम्र से ही मुश्किलों के पहाड़ का सामना कर रही है और भारतीय सेना ने जब उनके सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र में तैनात होने की घोषणा की तो राजस्थान ही नहीं, समूचा देश उनके संघर्ष की गाथा सुनकर हैरान रह गया। हालांकि सेना ने कैप्टन शिवा चौहान के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी है, लेकिन सेना के सूत्र बताते हैं कि शिवा को सियाचीन ग्लेशियर के लिए सेना की टीम में सोमवार को ही शामिल किया गया था, उस वक्त भी मौसम ने उनकी बहुत परीक्षा ली। शिवा के नेतृत्व वाली सेना इंजीनियरिंग कोर (सेपर्स) की टीम तैनाती के दौरान कई अहम इंजीनियरिंग टास्क सम्भालेगी और कम से कम तीन महीनों तक वहां तैनात रहेगी।


बचपन में खो दिया था पिता को
सीमा के संघर्ष की गाथा बचपन में ही शुरू हो जाती है, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। उस वक्त उनकी उम्र मात्र 11 साल थी। गृहिणी मां ने उन्हें पढ़ाया लिखाया। उदयपुर के स्कूल में आरम्भिक शिक्षा ग्रहण करने वाली शिवा अपने इरादों पर अडिग रही और उन्होंने उदयपुर के ही एनजेआर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग से सिविल इंजीनियरिंग की परीक्षा पास की। वह बचपन से ही सेना में जाना चाहती थी, लेकिन मुश्किलात कम नहीं थी। उन्होंने हौंसला रखा। मां व परिवार की पूरी मदद मिली और आखिर उन्होंने चैन्नई स्थिति ओटीएस से ट्रेनिंग लेकर सेना की इंजीनियरिंग रेजिमेंट में मई 2021 में कमिशन हासिल किया। अभी वे बंगाल सैपर्स यूनिट से जुड़ी हैं।

पास करनी पड़ी कड़ी परीक्षा
सियाचीन ग्लेशियर पर तैनाती की शिवा की कहानी भी कम रोचक नहीं है। शिवा ने गत वर्ष जुलाई में करगिल विजय दिवस के मौके सियाचीन वार मेमोरियल से कारगिल वार मेमोरियल तक हुए 508 किलोमीटर लम्बे सुरा सोई साइकलिंग अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने सुरा सोई इंजीनियरिंग रेजिमेंट की चुनौती स्वीकार करते हुए यह अभियान पूरा कर दिखाया। उनकी इसी उपलब्धि पर उनका चयन सियाचीन बैटल स्कूल में चयन हुआ और शिवा ने जीवन की चुनौतियों का सबसे दुर्गम बर्फीला पहाड़ भी फतह कर दिखाया। इसके लिए उन्हें एक महीने तक बर्फीली दीवार पर चढ़ाई और बर्फीले तूफान व इसमें फंसे लोगों को निकालने जैसे कड़े प्रशिक्षण का सामना करना पड़ा। शिवा को लगभग 15 हजार 600 फीट की ऊंचाई वाली कुमार पोस्ट पर तैनात किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी शिवा को उस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

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